पुरुषों में गोरेपन की बढ़ती होड़

एक महिला गोरापन हासिल करने के लिए

पहले तो महिलाओं में ही गोरापन तलाश किया जाता था अब पुरुष में भी इसकी होड़ लग गई है

एक समय था जब सांवला होना सुंदर होने के रास्ते नहीं आता था. राम, कृष्ण और शिव को सांवला बताया गया, सूफ़ी और प्रेमाश्रयी कवि भी अपनी इबादत 'सांवरे' के लिए लिखते-गाते रहे.

पर, धीरे-धीरे सांवरे सुंदर और सलोने न रहे शायद. कम से कम भारत में बाज़ार के ता़ज़े रुझान तो कुछ ऐसा ही कहते नज़र आते हैं.

इसे गोरे पन का जुनून ही कह सकते हैं कि भारत के बाज़ार में अगर किसी चीज़ ने कोका कोला और चाय को भी पीछे छोड़ दिया है तो वह कुछ और नहीं बल्कि गोरा करने वाली क्रीम है.

भारत में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शादी उद्योग भी है. यहाँ शादी-विवाह, दहेज़ और आभूषणों पर साल भर में 40 अरब डॉलर ख़र्च किया जाता है.

शादी-ब्याह के मौक़ों से सबसे ज़्यादा अगर किसी चीज़ की मांग है तो वह गोरे वर और गोरी वधु की ताकि आधुनिक भारत का दुल्हा या दुल्हन रूपहले पर्दे या फ़िल्मी दुनिया के किसी हीरो-हीरोइन से कम न लगें.

साल भर में 75 से भी ज़्यादा ऐसे रियलिटी शो आयोजित होते हैं जो इस मांग को बढ़ाने का काम करते हैं कि अगर आप गोरे और आकर्षक हैं तो बस चुटकी में ख्याति आप के क़दमों में होगी.

और इसी का नतीजा है कि भारत में सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाली क्रीमों का बाज़ार 18 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है.

भारत की सबसे बड़ी रिसर्च एजेंसी एसी नील्सन की मुताबिक़ इस साल यह दर 25 प्रतिशत तक चली जाएगी और इस क्रीम बाज़ार की क़ीमत का अनुमान 432 अरब डॉलर किया जा रहा है जो कि एक रिकार्ड है.

भारत के पुरूष अच्छा दिखना चाहते हैं

अभिनेता और मॉडल जॉन अब्राहम

इसके नीचे जाने के कहीं से आसार नहीं हैं क्योंकि अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2025 तक भारत का मध्यमवर्ग 10 गुना बढ़कर 58 करोड़ 30 लाख हो जाएगा.

हालांकि इन क्रीमों के प्रयोग से त्वचा पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिकित्सकों ने प्रश्न चिह्न लगा रखा है.

ब्रांड गोरापन

लोगों का आम विचार यह बन गया है कि जितना गोरा आपका रंग है आप उतने ही अधिक आकर्षक मनाने जाएंगे.

शाहरुख़

शाहरुख़ फ़ेयर एण्ड हैंडसम के ब्रॉंड दूत हैं

भारत के चोटी के अभिनेता और मॉडल जॉन अब्राहम का कहना है, "भारत के पुरूष अच्छा दिखना चाहते हैं."

इसका बाज़ार इतने ज़ोरों पर पहले कभी नहीं था. 32 साल पहले 1978 में हिंदुस्तान यूनिलीवर महिलाओं की त्वचा को गोरा और उजला करने के लिए फ़ेयर ऐंड लवली लेकर आया था और कोलकाता के इमामी ग्रुप ने फ़ेयर ऐण्ड हैंडसम के नाम से पुरूषों को गोरा करने का बीड़ा उठा रखा है.

कंपनी का दावा है कि यह दुनिया की नंबर एक गोरा करने वाली क्रीम है. हालांकि इसे 2005 में ही लॉंच किया गया है.

इसने 2008-09 के दौरान एक करोड़ 30 लाख डॉलर की रिकार्ड कमाई की और फ़िल्म जगत के सुपर स्टार शाहरुख़ ख़ान इसके ब्रांड दूत हैं.

इसके अलावा इसी तरह के दूसरे उत्पादों के लिए जानी मानी अभिनेत्रियां भी मैदान में हैं. कैटरीना कैफ़ ओले की नेचुरल व्हाइट प्रमोट कर रही हैं जबकि दीपिका पादुकोण नेट्रोजेना की फ़ाइन फ़ेयरनेस के कई ब्रांड प्रमोट कर रही हैं. सोनम कपूर लॉरियल की व्हाइट परफ़ेक्ट का प्रचार कर रही हैं तो प्रिटी ज़िंटा फ़ेम की हर्बल ब्लीच का प्रचार कर रही हैं.

इसके अलावा विभिन्न प्रकार और भी ब्रॉंड हैं जो त्वचा को गोरा करने, चमकीला करना, साफ़ करने, उजला करने, दाग़-धब्बे हटाने, ताज़गी देने, धुंधलाहट हटाने यहां तक कि चमका देने का दावा करते हैं.

इमामी ग्रुप के डॉयरेक्टर मोहन गोयनका का कहना है, "भारत में गोरेपन की होड़ है, हर कोई गोरा दिखना चाहता है."

हिंदुस्तान यूनिलिवर की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के पुरुष गोरा करने वाली क्रीम के बड़े ख़रीदार है.

मिसाल के तौर पर पिछले साल तमिलनाडु में त्वचा को उजला करने वाली क्रीम नारायणन की सबसे ज़्यादा बिक्री हुई है.

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़ आदिवासी प्रधान राज्य झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों जगह त्वचा को गोरा करने वाले उत्पाद की काफ़ी बिक्री है.

स्टेरॉयड्स

फ़्यर एण्ड हैंडसम

सबसे ज़्यादा गोरा होने की क्रीम दक्षिण भारत में बिक रही है.

विशेज्ञों का कहना है कि गोरा करने वाली क्रीम की मांग इसलिए बढ़ी है कि लोगों के रंग को लेकर गांवों में अभी भी भेदभाव की भावना पाई जाती है.

फ़ैशन डिज़ाइनर रोहित बल का कहना है, "भारत में हर कोई गोरा होना चाहता है. कभी-कभी इससे घृणा आने लगती है, लेकिन हर कोई गोरा करने वाली क्रीम रखता है."

इसके नतीजे में 50 रूपए से लेकर 1000 रुपए तक की क्रीम बाज़ार में अलग अलग मात्रा में उपलब्ध है.

अभी तक कोई ऐसा अध्ययन नहीं किया गया है कि एक महीने में किसी फ़ेयरनेस क्रीम से कितना गोरापन हासिल होता है. इसके अलावा इन उत्पादों के साथ बहुत सारे विवाद जुड़े हुए है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) के डर्मेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष वीके शर्मा कहते हैं, "अगर आप अपनी त्वचा पर कोई क्रीम लगाते हैं तो उसके साइड इफ़ेक्ट तो होते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि इन क्रीम में स्टेरॉयड्स होते हैं, लेकिन डॉक्टरों की बातें तो समुंदर में किसी बूंद की तरह हैं क्योंकि बाज़ार में चल रहे विज्ञापनों का लोगों के दिलो-दिमाग़ पर कहीं ज़्यादा असर होता है."

लेकिन कंपनियों का कुछ और कहना है. मोहन गोयनका कहते हैं, "हम लोग स्टेरॉयड्स नहीं बेच रहे हैं, हमारे ख़िलाफ़ एक भी क़ानूनी दावा नहीं किया गया है कि हम किसी की त्वचा से खेल नहीं रहे हैं, हमारे उत्पाद प्रयोगशाला में जांचे जा चुके हैं और हम इसके साक्षी हैं."

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