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'भारत की विकास दर छह फ़ीसदी रहेगी'

भारतीय अर्थव्यवस्था

ऐसे संकेत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है

भारत के प्रमुख उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का कहना है कि वर्ष 2009-10 में भारत की विकास दर छह फ़ीसदी से अधिक रहेगी.

सीआईआई का कहना है,'' सीआईआई के 70 फ़ीसदी से अधिक सदस्यों का मानना है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद छह फ़ीसदी रहेगा.''

सीआईआई ने जारी अपनी रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र पर चिंता जताई है.

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना था,'' औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि हुई है और पूंजी का प्रवाह बढ़ा है.''

उनका कहना था कि इन अच्छे संकतों के बावजूद कृषि क्षेत्र समस्याएँ पैदा कर सकता है.

कृषि पर चिंता

सीआईआई ने निर्माण और सेवा क्षेत्र की एक हज़ार से अधिक कंपनियों से इस सर्वेक्षण के लिए बातचीत की.

इसके पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने भी कहा था कि इस साल अर्थव्यवस्था तो बढ़ेगी पर कृषि क्षेत्र नहीं.

सी रंगराजन का कहना था कि वित्त वर्ष 2009–10 में देश का सकल घरेलू उत्पाद या आर्थिक प्रगति की दर 6.5 रहने की आशा है. ये दर बीते वर्ष की दर, 6.7 से दशमलव 0.2 फीसदी कम है.

रंगराजन का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट अभी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है और सूखे या वर्षा न होने के कारण उपजे हालात को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता.

उनका भी कहना था कि अर्थव्यवस्था के बाकी अंग आगे बढ़ेंगे लेकिन कृषि की विकास दर में दो प्रतिशत की कमी हो सकती है.

बीबीसी को जानिए

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