
प्रणब मुखर्जी जी-20 की बैठक में हिस्सा लेने स्कॉटलैंड गए थे
भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि विश्व अर्थव्यवस्था में चल रही मंदी के बावजूद भारत की विकास दर 6.7 प्रतिशत रही है.
उन्होने कहा, "इसका मुख्य कारण सरकार की ओर जारी किए गए प्रोत्साहन पैकेज रहे. दुनिया में छाई आर्थिक मंदी के कारण हमारे निर्यात पर असर पड़ना स्वाभाविक था इसलिए सरकार की रणनीति यह रही की देश के भीतर मांग बढ़े."
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शनिवार को स्कॉटलैंड में हुई जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने गए थे.
वहाँ से लौटकर उन्होंने रविवार को लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया.
स्कॉटलैंड में हुई बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन के वित्त मंत्री एलिस्टर डार्लिंग ने की थी.
प्रस्ताव
उन्होंने कहा था कि अर्थव्यवस्था में संकुचन का डर यों तो ख़त्म हो चुका है, लेकिन आपातकालीन वित्तीय पैकेज अभी वापस नहीं लिए जा सकते.
इसका मुख्य कारण सरकार की ओर जारी किए गए प्रोत्साहन पैकेज रहे. दुनिया में छाई आर्थिक मंदी के कारण हमारे निर्यात पर असर पड़ना स्वाभाविक था इसलिए सरकार की रणनीति यह रही की देश के भीतर मांग बढ़े
प्रणब मुखर्जी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने वित्तीय लेन-देन पर टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव किया था.
जब प्रणव मुखर्जी से इस टैक्स के बारे में पूछा गया तो उन्होने कहा कि अभी इसका ब्यौरा उपलब्ध नहीं हुआ है इसलिए कुछ कहना संभव नहीं है.
जी-20 की बैठक में शामिल वित्त मंत्रियों से कहा गया कि वो आर्थिक संकट के अलावा जलवायु परिवर्तन के विषय पर भी ध्यान दें और अगले महीने कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन में राजनीतिक सहमति बनाने की दिशा में प्रयास करें.
लेकिन प्रणव मुखर्जी ने कहा कि स्वच्छ तकनीक उपलब्ध करने के लिए धन की ज़रूरत है और अधिकतर धन धनी देशों को देना होगा हालांकि इसमें निजी क्षेत्र का योगदान भी हो सकता है.
चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बारे में किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ये सच है कि चीन के साथ सीमा को लेकर मतभेद बने हुए हैं लेकिन दो सिद्धांतों पर सहमति है- एक ये कि शांति बनाए रखी जाए और दूसरा द्विपक्षीय व्यापार में तेज़ी लाकर आर्थिक सहयोग बढ़ाया जाए.













