
मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक हुई
भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को तय किया है कि मुनाफ़ा कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सभी कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना अनिवार्य होगा और जो कंपनियाँ पहले से लिस्ट हुई हैं उनमें दस प्रतिशत हिस्सेदारी बाज़ार के शेयर धारकों की होगी.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया में ये एक बड़ा क़दम है.
सरकार ने कहा है कि इस तरह सरकारी कंपनियों के दस प्रतिशत विनिवेश से जो पैसा आएगा वो सीधे सामाजिक क्षेत्र में राष्ट्रीय पूँजीनिवेश फंड में जमा होगा और इस क्षेत्र में कल्याणकारी योजनाओं के लिए इस्तेमाल होगा.
मुनाफ़े वाली कंपनियों के लिए
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "मुनाफ़ा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों को आम जनता का पूँजी निवेश दस प्रतिशत रखना होगा और लाभ में चल रही उन सभी कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना होगा जो अभी वहाँ लिस्टिड नहीं हैं."
मुनाफ़ा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों को आम जनता का पूँजी निवेश दस प्रतिशत रखना होगा और लाभ में चल रही उन सभी कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना होगा जो अभी वहाँ लिस्टिड नहीं हैं
गृह मंत्री पी चिदंबरम
स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट न हुई जिन कंपनियों को लिस्ट किए जाने की बात हो रही हैं उनके लिए अनिवार्य होगा कि वे पिछले तीन साल से मुनाफ़ा कमा रही हों.
अपने पूँजी विनिवेश कार्यक्रम के तहत सरकार पहले ही ऑयल इंडिया लिमिटेड और कुछ अन्य कंपनियों के शेयर, बाज़ार में आम शेयर धारकों को बेच चुकी है.
इस वित्त वर्ष में सरकार ने इन निगमों मे विनिवेश के ज़रिए 4000 करोड़ रुपए से ज़्यादा पैसा एकत्र किया है.
भारत की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की विनिवेश नीति के तहत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश कर सकती है लेकिन उसे 51 प्रतिशत तक के शेयरों पर सरकारी मिलकियत रखनी ज़रूरी है.













