
टाटा मोटर्स का कहना है कि उसकी बिक्री में पिछली तिमाही में काफ़ी तेज़ी आई
भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने पिछली तिमाही में सात अरब 29 करोड़ रूपए का मुनाफ़ा होने की घोषणा की है.
ये मुनाफ़ा तमाम विश्लेषकों के अनुमान से कहीं अधिक है. विश्लेषकों का मानना था कि टाटा मोटर्स को इस तिमाही में चार अरब 32 करोड़ रूपए की कमाई होगी.
पिछले वर्ष सितंबर में ख़त्म हुई इसी तिमाही में टाटा मोटर्स को तीन अरब 47 करोड़ रूपए का लाभ हुआ था.
टाटा का कहना है कि भारत में 11.6 प्रतिशत कार बाज़ार उनके नियंत्रण में है.
साथ ही टाटा ने कहा है कि उन्होंने दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो की आपूर्ति भी शुरू कर दी है.
टाटा ने पिछली तिमाही में कुल 79 अरब 24 करोड़ रूपए की बिक्री की जबकि इसी तिमाही में पिछले वर्ष कंपनी ने 70 अरब 30 करोड़ रूपए का कारोबार किया था.
नैनो
कंपनी ने जगुआर और लैंड रोवर गाड़ियों की आपूर्ति शुरू कर दी है और उसे बाज़ार से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है
टाटा मोटर्स
टाटा ने कहा है कि उसने अभी तक 7,506 नैनो कार ग्राहकों तक पहुँचाई हैं.
एक लाख रूपए कीमत वाली उसकी ये नैनो गाड़ियाँ उत्तराखंड में लगाए गए कारखानों में बनी हैं.
नैनो के लिए पहले टाटा मोटर्स पश्चिम बंगाल में सिंगुर नामक स्थान पर कारखाने बनाना चाहती थी लेकिन ज़मीन हस्तांतरण को लेकर हुए विवाद के बाद टाटा ने पश्चिम बंगाल से बाहर जाने का फ़ैसला किया.
टाटा ने इसके बाद उत्तराखंड में कंपनी के पहले से ही चल रहे कारखानों में नैनो का निर्माण किया.
वैसे नैनो के निर्माण के लिए अलग से एक नया कारखाना गुजरात में बनाया जा रहा है.
टाटा ने कहा है कि उसका लक्ष्य हर साल पाँच लाख नैनो गाड़ियों का निर्माण करने का है.
महँगी गाड़ियाँ
टाटा ने पिछले साल से महँगी गाड़ियों के क्षेत्र में भी पैर रखा है.
टाटा ने इसके लिए ब्रिटेन में दो अरब 30 करोड़ डॉलर देकर फ़ोर्ड कंपनी से उसका जगुआर लैंड रोवर ब्रांड ख़रीदा.
टाटा ने कहा है,"कंपनी ने जगुआर और लैंड रोवर गाड़ियों की आपूर्ति शुरू कर दी है और उसे बाज़ार से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है".
कंपनी का कहना है कि पिछली तिमाही में भारत में जगुआर, लैंड रोवर और फ़िएट गाड़ियों की बिक्री में 27.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और उसने इस दौरान कुल 60,917 गाड़ियों की बिक्री की.
टाटा ने साथ ही इस महीने जगुआर लैंड रोवर ख़रीदने के बाद कंपनी पर आए कर्ज़ की बक़ाया राशि चुकाने के लिए निवेशकों से 75 करोड़ डॉलर भी जुटाए.












