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बजट भाषण-ऊपर नीचे हुआ सेंसेक्स

प्रणब मुखर्जी का बजट

बजट पर उद्योग जगत से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट ने जहाँ मतदाताओं को किए गए वादों पर पूरा उतरने की कोशिश की है वहीं बाज़ार को कुछ हद तक निराश किया है.

शेयर सूचकांक पर इसका असर साफ़ नज़र आया और बाज़ार पिछले छह महीने के अपने न्यूनतम स्तर पर जाकर बंद हुआ.

रुपए के वज़न में भी कमी आई और बॉंड भी औंधे मुंह गिरे.

जानकारों का कहना है कि सरकारी क्षेत्र में विनिवेश और सीधे विदेशी निवेश पर सरकार की चुप्पी ने बाज़ार को निराश तो किया ही है, वित्तीय घाटे के लक्ष्य में बढ़ोत्तरी से भी बाज़ार को धक्का लगा है.

बजट में वित्तीय घाटे को 6.8 प्रतिशत रखा गया है और कहा जा रहा है कि ये संख्या बाज़ार को रास नहीं आई.

विनिवेश पर किसी तरह के आँकड़े की कमी ने भी बाज़ार को निराश किया.

फ़िक्की के महासचिव अमित मित्र का कहना था, "अगर वित्त मंत्री विनिवेश के भी आँकडे दे देते तो हर तरफ तालियाँ बज जातीं. आशा है कि उनके आँकडे भी आपके सामने आ जाएँगे".

इन सबका असर ये रहा कि बाज़ार में कुल 850 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

शेयर सूचकांक सेंसेक्स में दर्ज तीस कंपनियों में से 29 में गिरावट नज़र आई और सबसे ज़्यादा असर दिखा बैंकों, धातुओं, तेल और गैस के शेयरों पर.

बजट पेश किए जाने से पहले बाज़ार में उछाल देखा गया और एक समय बाज़ार 15,000 से ऊपर चला गया था लेकिन 11 बजे बजट भाषण शुरु होते ही बाज़ार गिरने लगे और बजट भाषण ख़त्म होते समय बाज़ार 379 अंक गिरकर 14783 पर पहुँच गया था.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी क़रीब 60 अंकों की गिरावट देखी गई जो बजट भाषण से पहले 30 अंक ऊपर चल रहा था.

इससे पहले चार जून को बाज़ार पंद्रह हज़ार के आँकड़े को छू पाया था. पिछले तीन सत्रों में बाज़ार में 420 अंकों की बढ़त देखी गई है.

अभी तक ऐसा कम ही बार हुआ है कि बजट के बाद बाज़ार में तेज़ी देखी जाए.

आम तौर पर बजट के बाद बाज़ार गिरते हैं लेकिन मंदी के इस दौर में लोगों को बजट से बड़ी अपेक्षाएँ थीं और लग रहा था कि सरकार आर्थिक सुधारों की बड़ी घोषणाएँ करेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

बीबीसी को जानिए

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