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विनिवेश फिर शुरु करने की सलाह

प्रणब मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी ने चुनाव से पहले अंतरिम बजट पेश किया था

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2008-09 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया है.

भारतीय संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में इस वर्ष विकास दर सात से साढ़े सात फ़ीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया गया है.

इसमें करों पर अधिभार ख़त्म करने समेत कई तरह के आर्थिक सुधारों की ज़रूरत बताई गई है.

दोबारा सत्ता में आई संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार का यह पहला आर्थिक सर्वेक्षण है.

इसके मुताबिक राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना (एनआरईजीएस) से पूरे देश में साढ़े चार करोड़ परिवारों को फ़ायदा हुआ है.

व्यापक सुधार की गुंजाइश

छह जुलाई को पेश होने वाले आम बजट से पूर्व इस आर्थिक सर्वेक्षण में कुछ अहम संकेत दिए गए हैं.

इसमें कहा गया है कि फिलहाल कई करों पर अधिभार लगाए गए हैं, उनका कोई मतलब नहीं है. सर्वेक्षण में कर्मचारियों को वेतन के अलावा अन्य सुविधाएँ देने के लिए कंपनियों पर लागू वेतनेतर कर (फ़्रिंज बेनिफिट टैक्स) हटाने की सिफ़ारिश की गई है.

रेलवे, कोयला और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र को निजी कंपनियो के लिए भी खोलने की सलाह दी गई है. इन तीनों क्षेत्रों में फिलहाल सरकार का लगभग पूर्ण नियंत्रण है.

सरकार से रक्षा, बीमा और बहुल ब्रांडों के ख़ुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) की सीमा बढ़ाने की सलाह दी गई है.

रक्षा और बीमा क्षेत्र में एफ़डीआई की सीमा 49 फ़ीसदी करने की सलाह दी गई है.

आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए एक और प्रोत्साहन पैकेज देने और करों में छूट देने की सलाह दी गई है.

शुरु करें विनिवेश

सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी निजी क्षेत्रों और आम जनता को बेचने की प्रक्रिया फिर से शुरु करने की सिफ़ारिश की गई है.

पिछले कार्यकाल में मनमोहन सरकार पर वाम दलों की ओर से इसके ख़िलाफ़ ज़बर्दस्त दबाव था जिसके कारण विनिवेश प्रक्रिया को रोक दिया गया था.

सर्वेक्षण के मुताबिक मुनाफ़ा कमाने वाली ग़ैर नवरत्न कंपनियों की दस फ़ीसदी हिस्सेदारी बेची जा सकती है.

विनिवेश प्रक्रिया से 25 हज़ार करोड़ रूपए जुटाए जा सकते हैं जिसका इस्तेमाल सरकार सामाजिक क्षेत्र और बुनियादी संरचना को मज़बूत बनाने में कर सकती है.

रोज़गार गारंटी की सफ़लता

सर्वेक्षण में एनआरईजीएस की सराहना की गई है. यूपीए के पिछले कार्यकाल में शुरु की गई इस योजना को मनमोहन सिंह सरकार बड़ी सफ़लता के रुप में गिनाती रही है.

इसके बारे में कहा गया है कि वर्ष 2007-08 के मुक़ाबले वर्ष 2008-09 में इस योजना से लाभान्वित होने वाले लोगों की संख्या 32 फ़ीसदी बढ़ी है.

चुनाव से पहले पेश किए गए अंतरिम बजट में इस योजना के लिए तीस हज़ार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था.

बीबीसी को जानिए

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