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आर्थिक संकट हो सकता है मानवीय संकट

लंदन सम्मेलन

विश्व समुदाय ने एकजुटता की अपील की है

विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि मौजूदा वित्तीय संकट दुनिया के ग़रीब देशों के लिए एक मानवीय संकट बन सकता है.

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों की आर्थिक विकास दर इस साल 1.6 प्रतिशत तक गिर सकती है.

इसका मतलब होगा कि लाखों और लोग ग़रीबी का शिकार हो जाएँगे.

भारत और चीन को हटाकर विकासशील देशों के लिए इस साल की अर्थव्यवस्था का जो आकलन पेश किया गया है उसके अनुसार विकासशील देशों में इस साल मंदी का काफ़ी प्रभाव होगा.

इसके अलावा बैंक ने कहा है कि विकासशील देशों में होने वाले निवेश के संसाधनों में ज़बरदस्त कमी हो सकती है.

'कम होगा निवेश'

बैंक का कहना है कि लगातार दूसरे साल विकासशील देशों को जाने वाली निजी पूँजी काफ़ी कम होती जाएगी.

बैंक के मुताबिक़ पिछले साल के मुक़ाबले इस साल ये आँकड़ा लगभग 800 अरब डॉलर कम रहने की आशंका है. इसका मतलब होगा कि पिछले साल के मुक़ाबले 70 प्रतिशत कम.

रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर देश धन के इन निजी स्रोतों पर काफ़ी निर्भर रहते हैं.

बैंक का कहना है कि कई ऐसे बैंक और कंपनियाँ जो विकासशील देशों में विकास को बढ़ावा देती थीं वे ख़ुद मंदी का शिकार हो गई हैं.

इसका कहना है कि विकासशील देश अगले साल वापस विकास की दर पकड़ पाएँगे मगर इस आर्थिक मंदी से पहले उनकी जो विकास दर थी उसके मुक़ाबले उनकी स्थिति इस साल कमज़ोर ही होगी.

बीबीसी को जानिए

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