
रिजर्व बैंक ने विकास दर घटने की आशंका जताई है
दुनिया भर में छाई मंदी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. इससे निपटने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने रेपो रेट में एक बार फिर कमी की है ताकि बैंकों को कम ब्याज पर ऋण मुहैया हो सके.
रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट 25 अंक घटा कर 4.75 प्रतिशत कर दिया है.
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है.
इसके अलावे बैंक ने रिवर्स रेपो रेट में भी 0.25 प्रतिशत की कटौती करते हुए 3.75 प्रतिशत कर दिया है.
वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़जाने में जमा करते हैं और इस पर रिज़र्व बैंक जो ब्याज देता है उसे रिवर्स रेपो दर कहा जाता है.
इससे पहले रिज़र्व बैंक ने संभावना जताई थी कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर छह प्रतिशत ही हर जाएगी.
अर्थव्यवस्था में गति लाने के लिए रिज़र्व बैंक पिछले अक्टूबर से लेकर अब तक रेपो रेट में छह बार कमी कर चुका है.
अर्थशास्त्री सोनल वर्मा कहती हैं, "रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में 25 अंकों की कटौती कर बैंकों को अपने ब्याज दरों को और कम करने का संकेत दिया है."
कैश-रिज़र्व-रेश्यो (सीआरआर) की दर में कोई कटौती नहीं की गई है और वह 5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी.













