
कच्चे तेल के दाम पिछले सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत में उछाल आया है और यह 68 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गया है. ये पिछले सात महीने का सबसे ऊँचा स्तर है.
अमरीकी राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता का कहना था कि अगले हफ़्ते राष्ट्रपति ओबामा सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला से मिलेंगे तो वे तेल की क़ीमतों के संबंध में भी बातचीत करेंगे.
माना जा रहा है कि चीन में बढ़ती माँग, अमरीकी डॉलर की कमजोरी और शेयर बाज़ार की मजबूती के कारण ये उछाल आया है.
तेल की क़ीमतों में सुधार से ये संकेत भी मिले हैं कि अमरीकी अर्थव्यवस्था उतनी ख़राब स्थिति में नहीं है जितना कि अनुमान लगाया जा रहा था.
दूसरी ओर अमरीकी शेयर बाज़ारों में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं.
अगर आँकडों ने आर्थिक स्थिति में सुधार का समर्थन जारी नहीं रखा तो तेल की क़ीमतों को धक्का लग सकता है.
डेविड मूरे, आर्थिक विशेषज्ञ
हाल में तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने क़ीमतें बढ़ने की आशंकाओं के बीच तेल उत्पादन में किसी प्रकार का बदलाव करने से इनकार किया है.
सऊदी तेल मंत्री ने तो इस साल तेल की क़ीमतों के 75 डॉलर प्रति बैरल होने की आशा जताई थी.
उल्लेखनीय है कि पिछले साल जुलाई में कच्चे तेल की क़ीमत 147 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुँची थी.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाज़ार वास्तविकता से दूर जा रहा है और जैसे ही माँग में कमी की हक़ीकत से सामना होगा तो क़ीमतें गिर जाएगीं.
कॉमनवैल्थ बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के डेविड मूरे का कहना है कि यदि आँकडों ने आर्थिक स्थिति में सुधार का समर्थन जारी नहीं रखा तो तेल की क़ीमतों को धक्का लग सकता है.















