|
|
 |
रविवार, 18 मई, 2003 को 01:45 GMT तक के समाचार धनी देश आशावान
|

फ्रांस में बैठक के लिए जुटे जी-8 के वित्त मंत्री
|
दुनिया के आठ धनी देशों के समूह जी-8 के वित्त मंत्रियों ने इस बात का भरोसा जताया है कि विश्व अर्थव्यवस्था में दो प्रमुख चुनौतियों के बावजूद वृद्धि हो सकती है.
ये दो चुनौतियाँ हैं - आतंकवाद और अमरीकी डॉलर की कीमत में आ रही गिरावट.
जी-8 के वित्त मंत्रियों ने फ़्रांस में दूविले में बैठक के बाद विश्व अर्थव्यवस्था के बारे में ये राय ज़ाहिर की है.
वित्त मंत्रियों ने कहा कि हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था पर दो तरह के संकट छाए थे लेकिन अब उनका असर कम हो गया है.
वित्त मंत्रियों का मानना था कि एक ओर जहाँ इराक़ में लड़ाई ख़त्म हो चुकी है वहीं सार्स बीमारी को चीन से बाहर फैलने से काफ़ी हद तक रोका जा सका है.
डॉलर
 अमरीकी वित्त मंत्री जॉन स्नो | वैसे बैठक में मुद्रा बाज़ार की हालत पर विस्तार से चर्चा से बचने के प्रयास किए गए.
मुद्रा बाज़ार में यूरो और येन की तुलना में डॉलर की कीमत फिर गिरती जा रही है.
डॉलर की कीमत गिरने के कारण बाज़ार में दूसरे महत्वपूर्ण देशों जैसे जर्मनी और जापान के निर्यात पर असर पड़ता है जो पहले से ही मुश्किलों से जूझ रहे हैं.
लेकिन कई लोग मानते हैं कि डॉलर की कमज़ोरी अमरीका के लिए फ़ायदेमंद है क्योंकि ऐसे में उनके लिए प्रतियोगिता आसान हो जाती है.
इसके पहले वित्त मंत्रियों की बैठक में ऐसी बातों पर गंभीरता से चर्चा होती थी.
मगर अमरीका के वित्त मंत्री जॉन स्नो ने कहा कि मुद्रा के विषय पर कोई गंभीर विचार विमर्श नहीं हुआ.
इराक़
इराक़ के संबंध में वित्त मंत्रियों ने कहा कि अगले दो साल तक इराक़ को दिए गए अंतरराष्ट्रीय कर्ज़ की वापसी की माँग नहीं की जाएगी.
अमरीकी वित्त मंत्री जॉन स्नो ने साथ ही ये भी कहा इस बात का पता लगाने के लिए और प्रयास किए जाएँगे कि इराक़ पर पूरी दुनिया का कितना कर्ज़ है.
कुछ अमरीकी अधिकारी इराक़ को कर्ज़ देनेवाले देशों से इस कर्ज़ को भूल जाने की भी बात करते रहे हैं.
उनका कहना है कि जो कर्ज़ लिया गया उससे आम इराक़ियों को कोई फ़ायदा नहीं हुआ.
जी-8 के तीन महत्वपूर्ण सदस्यों - रूस, जर्मनी और फ़्रांस - ने इराक़ को अच्छा ख़ासा कर्ज़ दिया था.
और तीनों ही इराक़ पर हमले के विरोधी थे. |
|
|
|