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एक हुआ करते थे जेपी

सुशील झा सुशील झा | गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012, 14:00 IST

आज अमिताभ बच्चन का जन्मदिन है. अगर आप ये बात नहीं भी सुनना चाहेंगे तो आपको सुननी पड़ेगी..जाननी पड़ेगी और इस बारे में सोचना पड़ेगा. मजबूरी है मीडिया में आज अमिताभ छाए हुए हैं.

लेकिन शायद ही किसी को याद होगा कि आज के ही दिन एक और बड़े आदमी का जन्म हुआ था....जिसका नाम जयप्रकाश नारायण था.

जो जयप्रकाश नारायण या जेपी के बारे में नहीं जानते उन्हें सिर्फ इतना बताना ज़रुरी होगा कि ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने देश में भ्रष्टाचार को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और इंदिरा गांधी जैसी शक्तिशाली नेता के खिलाफ मोर्चा खोला था.

नेहरु के दौर में राजनीति में बड़ा नाम थे जेपी. विचारों से मार्क्सवादी लेकिन बाद में बिल्कुल गैर राजनीतिक हो गए थे.

लेकिन जब उन्हें लगा कि देश भ्रष्टाचार के गर्त में जा रहा है तो उन्होंने पटना से शुरुआत की थी आंदोलन की जिसे नाम दिया गया था संपूर्ण क्रांति.

नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और कई अन्य नेता इसी आंदोलन की उपज माने जाते है. जेपी का आंदोलन कितना सशक्त था इसका अंदाज़ा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि सारी विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई थीं. फिर चुनावों में हारीं इंदिरा गांधी. लगा आपातकाल और जब फिर चुनाव हुआ तो पहली बार भारत में गैर कांग्रेसी सरकार बनी ....जनता पार्टी सरकार.

सरकार में जेपी ने कोई पद नहीं लिया था.

ये देश की विडंबना ही है कि जहां हर दिन एक नया भ्रष्टाचार सामने आ रहा है और इस भ्रष्टाचार पर सबसे अधिक बोलने वाले नेता भी जेपी की दुहाई देते रहे हैं उन्हें भी जेपी की सुध नहीं है.

इंडिया अगेनस्ट करप्शन के फेसबुक पन्ने पर जयप्रकाश नारायण से जुड़ी एक फोटो है...लेकिन ये फोटो उन्होंने नहीं लगाई है. किसी और ने लगाई है जिसे उन्होंने शेयर किया है.

यानी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने वाला और पूरे देश में संपूर्ण क्रांति लाने वाले आदमी से उनका लेना देना कम ही है.

लेकिन इसमें ग़लती उनकी भी नहीं है. सुबह से टीवी चैनलों, वेबसाइटों (जिसमें बीबीसी की वेबसाइट भी शामिल है) अमिताभ बच्चन छाए हुए हैं.

सत्तर के अमिताभ...जयप्रकाश से कहीं अधिक पापुलर हैं. अगर समय आम होता तो कोई बात न होती.

जब हम कहते हैं कि हम सबसे भ्रष्ट दौर में रह रहे हैं तब जयप्रकाश को याद किया जाना ज़रुरी है ....अमिताभ से कोई गिला नहीं शिकवा नहीं लेकिन जेपी को भूल जाने का गिला भी है शिकवा भी रहेगा.

खैर मुख्यधारा की मीडिया से अपेक्षाएं कब की खत्म हो चुकी हैं..लेकिन सोशल मीडिया से उम्मीद थी..सुबह से लग रहा था कि कहीं न कहीं लोग जेपी को याद करेंगे लेकिन एक डेढ़ हज़ार मित्रों में शायद कहीं एक पोस्ट जेपी पर दिखा...पोस्ट नहीं शायद फोटो थी....लेकिन जेपी का नाम नहीं..समझने वाले समझ गए थे....लोगों ने टिप्पणी की थी लेकिन ज़िक्र कहीं नहीं था कि जेपी भी आज ही पैदा हुआ था.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 14:28 IST, 11 अक्तूबर 2012 Rubi singh:

    एकदम सही सुशील जी.

  • 2. 14:43 IST, 11 अक्तूबर 2012 Indu Singh:

    ये सही है की आज के लोग देश के इन आधार स्तंभों को भूलते जा रहे है और ये भी की जिस आजादी की हवाओं में वो सांस ले रहे है जिस स्वतंत्र ज़मीन पर वो सीना तानकर खड़े है वो इन्हें इन्ही देशभक्तों ने दिलाई है जे'पी' के आन्दोलान से प्रेरणा लेकर जन आन्दोलन करने वाले उन्हें भूल सकते है पर जो मिटटी की कीमत जानते है और गुलामी की ज़ंजीरो से मुक्त कराने वालो के कृतग है वो उनके कभी विस्मृत नहीं कर सकते.

  • 3. 14:50 IST, 11 अक्तूबर 2012 ganesh:

    तभी हम भारत जैसे भ्रष्ट देश में रह रहे हैं. शुक्रिया सुशील ये लिखने के लिए.

  • 4. 15:39 IST, 11 अक्तूबर 2012 Shalini:

    सही कहा आपने सुशील जी.

  • 5. 15:48 IST, 11 अक्तूबर 2012 Prince Kumar:

    जेपी को भूलकर आज सभी उस अमिताभ के जयगान में लगे हुए हैं जिसकी बोलती राज ठाकरे जैसे व्यक्ति की एक घुड़की से बंद हो जाती है और बात माफी मांगने तक पहुँच जाती है. और इससे भी ज्यादा दुख तब होता है जब हम ये देखते हैं कि उनके ही चेले सत्ता के लिए उनके आदर्शों की मिट्टी बार-बार पलीद करते दिख जाते हैं. संपूर्ण क्रांति के सूत्रधार जयप्रकाश अमर रहें.

  • 6. 16:28 IST, 11 अक्तूबर 2012 saurabh yadav:

    आज सुबह-सुबह हिंदुस्तान अखबार देखा तो श्री बच्चन साहब के जन्मदिन की बात से अखबार भरा पड़ा था. मेरे रूममेट ने कहा कि ये अमित जी का जन्मदिन नहीं लगता, बल्कि जैसे कोई राष्ट्रीय पर्व हो ऐसा लगता है. क्या करें आज की पीढ़ी की यही मांग है.

  • 7. 16:47 IST, 11 अक्तूबर 2012 Ajit Kumar Das:

    युग पुरुष जय प्रकाश नारायण जी को हम सभी भारतवासियों की तरफ से कोटि - कोटि नमन.

  • 8. 16:55 IST, 11 अक्तूबर 2012 Harishankar Shahi:

    जेपी को इस दौर में भुलाने की कसक तो है. यह भी खास है कि यह तब जब अभी हाल ही में टीवी चैनल और अखबार एक घोषित जमावड़े को भ्रष्टाचार विरोधी क्रांति बताने में जुटे थे. जिसमें टोपी पहनकर उससे पहनने की अनकही गुजारिश करते दिख रहे थे. वही सब आज भ्रष्टाचार की देश में एक सबसे बड़ी क्रांति को और सबसे बड़े जननायक को भूल बैठे यह बहुत ही दुखद है. इस देश में लोग गांधी को सिर्फ राम धुन बजाकर इसीलिए याद कर लेते हैं क्योंकि सरकारी स्तर पर कुछ नियम हैं. लेकिन जनता से बनी सरकार को जनता के सरोकार के लिए झुकाने वाले की जन्मतिथि सरकार को छोडिये जनता को भी याद नहीं है. यही वह उदारीकरण का खतरा है जिसके प्रति समाजवाद के प्रणेता चेताया करते थे. अब आंदोलन टीवी और फेसबुक पर होते हैं वह भी एसी में बैठकर. मीडिया का चरित्र दिल्ली में कुछ घरों में टीआरपी मीटर से तय होने के कारण सिताब दियारा छूते ही जाता है. बीबीसी की एक यही बात सबसे अच्छी है कि आपने सबके साथ ही बीबीसी के अमिताभ कवरेज को भी निशाना बनाया है. कुछ भी कहा जाए या सब कुछ कहा जाए पर आज जेपी का जनांदोलन उस उदारीकरण से प्रेरित टीवी टोपी वाले आंदोलन से कम याद कारक होकर रह गया है. आंदोलन की शहादत पर जेपी याद आये बहुत आये....

  • 9. 18:46 IST, 11 अक्तूबर 2012 dr.nirupama varma:

    किसी ने सही कहा है - जिनकी लाशों पे चल के ये आजादी आयी है, उनकी याद बहुत गहरी हमने दफनाई है.

  • 10. 11:36 IST, 12 अक्तूबर 2012 Happy Singh:

    सुनकर बुरा लगा क्योंकि मैं जेपी के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानता लेकिन ये दुखी करने वाली स्थिति है कि हम जेपी को नजरअंदाज कर रहे हैं. ये देश का दुर्भाग्य है. जय हिंद.

  • 11. 12:43 IST, 12 अक्तूबर 2012 sulochana anand:

    जेपी को भूलना एक दुखद घटना है.

  • 12. 13:47 IST, 12 अक्तूबर 2012 अमल कुमार विश्वास:

    आपने जेपी को याद किया, यह भारत के लिए गौरव की बात है.

  • 13. 16:54 IST, 12 अक्तूबर 2012 प्रियंका :

    किसी ने कभी ये कहा था कि शहीदो की चिताओ पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यहीं बांकी निशां होगा. लेकिन अब तो शायद ये शब्द भी कुछ ज्यादा ही है क्योंकि मेले तो तभी लग सकते है जब लोगों के जहन में उनकी याद बांकी हो.खैर आपने ये काबिलेतारीफ काम किया इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.

  • 14. 18:06 IST, 12 अक्तूबर 2012 jitendra tiwari:

    निसंदेह जय प्रकाश जी इस तरह भुला दिया जाना दुखद है क्योंकि हम सबसे भ्रष्ट ही नहीं मूल्य रहित समाज में जी रहे और जब स्वार्थ ही सर्वोपरि और ग्लैमर का ही राज हो तब ऐसा होना तय है

  • 15. 19:02 IST, 12 अक्तूबर 2012 yogesh dubey:

    आपने अच्छा ब्लॉग लिखा है सुशीलजी.ये सही है कि हम जेपी को भूल गए हैं.

  • 16. 03:52 IST, 13 अक्तूबर 2012 Anuradha Paudel Paris :

    सुशील जी आपका बात बिलकुल सही है . ये जमाना पैसे के पीछे कूदने का है. ये जमाना मनोरंजन के पीछे कूदने का है. पहले लोग सोचते थे इमानदारी और नैतिकता जीवन की अमूल्य वस्तुए हैं,। लेकिन धारणा बदल गई, सँसार बदल गए . हर देश में भ्रष्टाचार है. भ्रष्टाचारी लोग इमानदारी तको पर्दाके पीछे धकेलते हैं।

  • 17. 07:00 IST, 13 अक्तूबर 2012 Yogeshwar Sanchihar:

    बीबीसी समेत मीडिया का धन्यवाद क्योंकि मुझे नही मालूम था कि जेपी कौन थे.लेकिन मुझे मालूम है कि पूनम पांडे कौन हैं. हमें शर्मशार होना चाहिए.

  • 18. 17:46 IST, 13 अक्तूबर 2012 raza husain:

    कम से कम आपको याद तो हैं जेपी.मैं तो सोच रहा था कि सारा का सार मीडिया ही जेपी को भूल गया है.

  • 19. 15:08 IST, 14 अक्तूबर 2012 manish kumar:

    बहुत सही कहा आपने सुशीलजी.आज सच में हमने सही आदमी को भूला दिया है.

  • 20. 15:15 IST, 14 अक्तूबर 2012 Yogeshwar Sanchihar:

    मीडिया में काम करने वालों का धन्यवाद क्योंकि मुझे जेपी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

  • 21. 19:57 IST, 15 अक्तूबर 2012 karunesh:

    आपकी रिपोर्ट ने दिल छू लिया.

  • 22. 10:31 IST, 17 अक्तूबर 2012 vijai kumar:

    11 अक्टूबर को जेपी के दाहिने हाथ नाना जी देशमुख का भी जन्मदिन है. उन्हें भी किसी भी नही याद नही किया.

  • 23. 12:08 IST, 17 अक्तूबर 2012 Amit Alok:

    महानता किसी परिचय की मोहताज नही होती. भारत के लिए जेपी न भूलने वाली शख्सियत हैं.

  • 24. 02:57 IST, 18 अक्तूबर 2012 यूसुफ अली अजीमुदीन खाँ, रियाद ,सऊदी अर:

    अमिताभ जैसे इन्सान को मीडिया ने चढा रखा है . पैसे इसने कमाये हैं तो अपने खुद के लिए. फिर ऐसे इन्सान की इतनी तारीफ क्यों. ऐसे इन्सान को भूलकर जेपी जैसे नेता को याद करना चाहिए .

  • 25. 13:56 IST, 18 अक्तूबर 2012 Amrendra Kumar:

    दीमक की तरह देश को खाने वाले हमारे नेता, लोकनायक जयप्रकाश नारायण को भला क्यों याद करेंगे. आखिर जेपी ने ही पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में आवाज बुलंद की थी. भ्रष्टाचार और नेता में तो चोली-दामन का रिश्ता है, फिर वो अपने शत्रु को क्यों याद करेंगे. वहीं आज के युवा जिन्हें देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम तक याद नहीं रहते हैं, वो भला लोकनायक को कैसे याद रखेंगे. उन्हें तो बस फिल्मों की फर्स्ट शो की फिक्र होती है. फिर चौथा स्तंभ कहां था, उसे तो बस टीआरपी की जरूरत है.

  • 26. 16:01 IST, 18 अक्तूबर 2012 Prashant sagar:

    अन्य मीडिया समूह के बारे में बात क्यों करें .मैंने तो बीबीसी पर ही जेपी पर कोई पोस्ट नहीं देखी.

  • 27. 18:07 IST, 18 अक्तूबर 2012 taukil ali:

    हमारे देश में दुर्भाग्य है कि ऐसे नेता को याद नहीं किया जाता.इसलिए देश में इतनी लूट मची है.

  • 28. 21:09 IST, 18 अक्तूबर 2012 kirnesh:

    जेपी भी अपनी विचारधारा को भूल गए थे इसलिए मीडिया ने भी जेपी को भूल कर कर कोई गलती नहीं की.

  • 29. 00:00 IST, 20 अक्तूबर 2012 surendra bhakal:

    आपने बहुत सही लिखा है.

  • 30. 21:28 IST, 22 अक्तूबर 2012 गंगा सहाय मीणा :

    शुक्रिया इस मौके पर जेपी को याद करने-कराने के लिए. आज जब चारों ओर सत्‍ता व राजनीति में विकल्‍प की तलाश जारी है, जेपी और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं. दरअसल यह पूंजीवादी मीडिया का दौर है, इसमें बाजार तय करता है कि हम किसे याद करें, किसे नहीं. ऐसे दौर में यहां जेपी को याद किया जाना वैकल्पिक पत्रकारिता का उदाहरण ही कहा जाएगा.

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