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सचिन और शोएब.....

रेहान फ़ज़ल रेहान फ़ज़ल | सोमवार, 26 सितम्बर 2011, 00:38 IST

मैं उस दिन सेंचुरियन मैदान सुबह आठ बजे ही पहुँच गया था. भारत और पाकिस्तान विश्व कप के सुपर सिक्स में पहुँचने के लिए महत्वपूर्ण मैच खेल रहे थे. स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था.
पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले खेलने का फ़ैसला किया था.
सईद अनवर ने जिस तरह बुलेट ट्रेन वाली पारी खेली थी,पवेलियन में मौजूद भारतीय दर्शकों की बॉडी लेंग्वेज बिगड़ गई थी.
राज सिंह डूँगरपुर कह रहे थे लड़के थके हुए नज़र आ रहे हैं.पाकिस्तान ने 273 रन बनाए थे और ज़्यादातर विशेषज्ञ कह रहे थे कि मैच भारत के हाथ से निकल चुका था.सचिन तेंदुल्कर और वीरेंद्र सहवाग क्रीज़ पर उतरे.आम तौर से सहवाग पहली गेंद खेलते हैं.
उस दिन सचिन ने पहले स्टॉन्स लिया. वसीम अकरम की तीसरी गेंद पर उन्होंने चौका लगाया. दूसरे ओवर में शोएब अख़्तर गेंद फेंकने आए.
शोएब के ओवर की चौथी गेंद ऑफ़ स्टंप से दो फ़ुट बाहर थी लेकिन उसकी गति थी 151 किलोमीटर प्रति घंटा ! सचिन अगर उस गेंद को छोड़ देते तो शर्तिया वाइड होती. लेकिन उन्हें शोएब से अपना हिसाब चुकता करना था. उन्होंने पूरी ताक़त से उसपर अपर कट लगाया और गेंद छह रनों के लिए डीप बैक्वर्ड प्वाएंट बाउंड्री पर जा उड़ी.

शोएब ने अपने मील भर लंबे रन अप से बेन जॉन्सन के अंदाज़ में दौड़ना शुरू किया. इस बार गति थी उससे भी तेज़ ....154 किलोमीटर प्रति घंटा ! सचिन ने इस बार गेंद को स्कवायर लेग बाउंड्री की तरफ़ ढ़केला. इस शॉट ने शोएब को इतना हतोत्साहित कर दिया कि लगा कि वह अपने बॉलिंग मार्क पर ही नहीं पहुंचना चाह रहे. लेकिन अभी कहानी ख़त्म नहीं हुई थी.

शोएब की अंतिम गेंद को सचिन ने ऑफ़ स्टंप पर शफल करते हुए महज़ ब्लॉक भर किया. कोई बैक लिफ़्ट नहीं, कोई फ़ौलो थ्रू नहीं.... किसी की शायद ज़रूरत भी नहीं थी. कोई अपनी जगह से हिल भी पाता इससे पहले गेंद मिड ऑन बाउंड्री के रस्से को छू रही थी. अब तक दर्शक पागल हो चुके थे.
शोएब अख़्तर के जले पर नमक छिड़का उन्हीं के कप्सान वकार यूनुस ने जब उन्होंने अगले ही ओवर में शोएब को गेंदबाजी से हटा लिया. हाँलाकि अंतत: शोएब ने थके हुए रनर के सहारे खेल रहे सचिन तेंदुल्कर को एक शॉर्ट पिच गेंद से आउट किया लेकिन तब तक सचिन 75 गेंदों पर 98 रन बना चुके थे और भारत जीत की ओर बढ़ रहा था.

शोएब अख़्तर ने दस ओवरों में 72 रन दिए थे जो उनका एक दिवसीय क्रिकेट में अब तक का सबसे कीमती स्पेल था. 32 के स्कोर पर जब सचिन का एक मुश्किल कैच अब्दुल रज़्ज़ाक ने मिस किया तो मैदान पर ही चिल्ला कर वसीम अकरम ने उनसे कहा था, 'जानता है किसका कैच तूने छोड़ा है.'

जब सचिन लंगड़ाते हुए पवेलियन लौटे तो स्टेडियम का एक एक आदमी अपने स्थान पर खड़ा था. मैं भी उनमें से एक था. मेरे ख़्याल से उसी दिन चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर जावेद मियाँदाद द्वारा लगाए गए छक्के का बदला ले लिया गया था.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 02:24 IST, 26 सितम्बर 2011 अनन्त :

    अदभुत रेहान जी.

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  • 2. 02:30 IST, 26 सितम्बर 2011 Devanshu Nigam:

    रेहान जी, सबसे पहले तो आपको नमस्कार. बीबीसी पर आपके प्रोग्राम मैं पिछले बहुत समय से सुनता आ रहा हूँ. पहली बार है कि आपके किसी लेख पर कुछ कहने जा रहा हूँ.
    रही बात सचिन और शोएब की, तो ये जगजाहिर हो चुका है कि शोएब अपनी किताब बिकवाना चाहते हैं और कोई भी उनकी बातों से सहमत नहीं है. एक समय उनके कप्तान रहे स्वयं वसीम अकरम भी.
    भारत पाकिस्तान का ये मैच मैंने कॉलेज के कॉमन रूम में देखा था दोस्तों के साथ, बाकी आप खुद ही समझ गए होंगे.
    साथ ही बात करनी होगी राहुल द्रविड़ की भी (उनके बारे में भी शोएब ने लिखा है). एक समय में शोएब ने अपनी ज़िंदगी में दूसरे नंबर की सबसे तेज गेंद द्रविड़ को डाली थी और फ्रंट-फुट पर प्लेस करते हुए द्रविड़ ने गेंद बाउंड्री के पार पहुंचा दी थी.
    शोएब अख्तर की बेफजूल हैं. उन पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं लगती.

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  • 3. 08:20 IST, 26 सितम्बर 2011 vikas kushwaha, kanpur:

    क्या खूब लिखा है रेहान साहब. बहुत-बहुत धन्यवाद.

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  • 4. 12:15 IST, 26 सितम्बर 2011 naval joshi:

    रेहान सहाब आपने लिखा कि उसी दिन चेतन शर्मा की गेंद पर मियॉदाद द्वारा लगाये गये छक्के का बदला ले लिया गया था. मेरे ख्याल से यह नजरिया खेल के अनुकूल नहीं है. मियॉदाद ने जो छक्का लगाया वह भी खूबसूरत था और सचिन ने शोएब के खिलाफ जो पारी खेली वह भी खूबसूरत थी. खेल में खूबसूरती इसलिए नहीं होती है कि कोई खिलाडी हमारे देश का है अथवा नहीं. दुर्भाग्य से 100 मीटर फर्राटा में हमारे देश का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है लेकिन इससे इस स्पर्धा का आकर्षण कम नहीं हो जाता है. चीते की चपलता और तेज़ी से ट्रैक पर इंसान को दौडते देखना अपने आप में कल्पनातीत रोमांच है. इसलिए, अगर वो खिलाड़ी मेरे देश का हो या फिर दूसरे देश का, वह बहुत मायने नहीं रखता. खेलों में राजनीतिक का पुट नहीं डाला जाना चाहिए. अक्सर लोग कहते हैं कि भारत ने पाकिस्तान को रौंद दिया या फलाँ देश ने दूसरे देश को धूल चटा दी. यह तरीका ठीक नहीं है. खेल में उन्माद पैदा करना बडी-बडी प्रायोजक कम्पनियों का अपने माल को बेचने का षड़यन्त्र हो सकता है लेकिन हम जैसे आम लोग खेल देखना चाहते हैं और कुछ नहीं. अपने देश के खिलाडियों के प्रति थोडा झुकाव स्वाभाविक होता है लेकिन कहीं यह उन्माद तक न पहुँच जाए इसके लिए हमें सतर्क भी रहना चाहिए.

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  • 5. 14:30 IST, 26 सितम्बर 2011 Shabih Haider (Ras-Al-Khaimah):

    सचिन किस किस बॉलर से डरते थे ये आपको शेन वॉर्न से अच्छा कोई नहीं बता सकता है जिसके सपने में सचिन आते थे. ये सिर्फ़ पब्लिसिटी पाने के लिए किया है वर्ना सचिन क्या सहवाग, गाँगुली ने भी अख़्तर को अच्छी तरह से धोया है.

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  • 6. 14:34 IST, 26 सितम्बर 2011 उमेश यादव:

    सचिन का नाम तो शोएब साहब इसलिए चीख-चीख कर ले रहे है ताकि उनकी पुस्तक की बिक्री बढ़े. इसमें कोई दो राय नहीं कि शोएब दुनिया के बेहतरीन तेज गेंदबाज रहे हैं पर सचिन तो सचिन हैं. कोई भी तेजी उनकी चमक को धुंधला नहीं कर पाई है.

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  • 7. 14:36 IST, 26 सितम्बर 2011 उमेश यादव:

    सचिन का नाम तो शोएब इसलिए चीख-चीख कर ले रहे हैं ताकि उनकी पुस्तक की बिक्री बढ़े. इसमें कोई दो राय नहीं कि शोएब दुनियां के बेहतरीन तेज गेंदबाज रहे हैं पर सचिन तो सचिन हैं. कोई भी तेज़ी उनकी चमक को धुंधला नहीं कर पाई है.

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  • 8. 16:48 IST, 26 सितम्बर 2011 Sandeep Mahato:

    रेहान फज़ल जी मैं तो आपकी प्रस्तुति का कायल हूँ. आपने जिस तरह से लिखा है ऐसा लगा जैसे मैं फिर से वो मैच देख रहा हूँ, सचमुच विश्व कप का वो मैच सबसे रोमांचकारी मैचों में से एक था. शायद ये ब्लॉग अगर शोएब अख्तर पढ़ लेते तो वो ये कभी नहीं कहेंगे की सचिन उसकी गेंद से डरते थे.

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  • 9. 19:05 IST, 26 सितम्बर 2011 kaushal kishore:

    रेहान साहब, अदभुद लेख, सेंचुरियन से शुरू और शारजाह में जावेद मियांदाद के छक्के का बदला लेने को जिस तरह पिरोया गया, खूबसूरत है. आपको बहुत-बहुत बधाई.

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  • 10. 20:54 IST, 26 सितम्बर 2011 r.k.jha:

    रेहान साहब वैसे तो मुझे क्रिकेट से कोई खास प्रेम नहीं, लेकिन जिस मैच का ज़िक्र आपने किया है उसे मैंने भी देखा था. पागल हो जाने वाले दर्शकों में मैं भी था. शोएब के लिए कहूंगा कि महत्वहीन बातों पर ध्यान न दिया जाए तो ही बेहतर है.

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  • 11. 21:25 IST, 26 सितम्बर 2011 raushan mohammad:

    शोएब के लाख चाहने पर भी इस गलत बयानबाज़ी से वो अपनी किताब के लिए पाठक नहीं जुटा पाएंगे.

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  • 12. 21:51 IST, 26 सितम्बर 2011 muqeem zafar:

    रेहान साहब अपने जो लिखा है वो कुछ नया नहीं. ये बातें जग ज़ाहिर हैं. वैसे शोएब कि किताब अच्छी बिकती अगर उन्होंने सट्टेबाज़ों का ज़िक्र किया होता.

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  • 13. 22:42 IST, 26 सितम्बर 2011 sameer nairantarya:

    बहुत शानदार लेख रेहान जी, दो टूक विश्लेषण. मैं शुरु से ही सोच रहा था कि इस प्रकरण में कोई भी सेंचूरियन प्रकरण की बात क्यों नहीं कर रहा. जब सचिन से पिटे हुए शोएब ने अपने कप्तान से विनती की थी कि उन्हें गेंदबाज़ी से हटा दिया जाए. शोएब को ये बताना ज़रूरी है कि अगर वो डरपोक हैं तो हर कोई ऐसा नहीं हो सकता. अपने बेहतरीन विश्लेषण और नयाब अंदाज़ के लिए आपका धन्यवाद.

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  • 14. 01:08 IST, 27 सितम्बर 2011 Ramesh Sharma:

    रेहान जी मैं आपके खेल संबंधी कार्यक्रम हमेशा सुनता हूं. आज आपका ब्लॉग पढ़कर बहुत आनन्द आया.

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  • 15. 06:35 IST, 27 सितम्बर 2011 Vipin kumar Diwakar:

    आपका नज़रिया अच्छा है. ये ब्लॉग शोएब अख्तर को जरूर पढ़ना चाहिए.

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  • 16. 11:31 IST, 27 सितम्बर 2011 Umesh Yadav:

    धन्यवाद रेहान जी, बहुत बढ़िया लेख. मुझे सेंचुरियन का मैच याद है. मैंने पिछले 20 साल मे कई दिग्गज गेंदबाज़ देखे हैं, लेकिन किसी को भी सचिन के बारे में बुरा कहते नहीं सुना. शोएब का ये बयान सूरज को रोशनी दिखाने जैसा है.

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  • 17. 15:57 IST, 27 सितम्बर 2011 vikas kushwaha, kanpur:

    सभी पाठकों की राय एक जैसी देखकर अच्छा लगा.

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  • 18. 21:11 IST, 27 सितम्बर 2011 Tousif khan bikramganj:

    बिलकुल सही रेहान जी. सचिन दुनिया के नम्बर एक बल्लेबाज है, और वो किसी भी रफतार वाले गेँदबाज से खौफ खाने वालो मे से नही.

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  • 19. 23:23 IST, 27 सितम्बर 2011 dr.bhoopendra singh:

    रेहान जी आपने जिस तरह दुनिया के दो महान क्रिकेटरों के बारे में बयान किया है वो पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा. इसमें कोई शक नहीं है कि शोएब बहुत तेज़ गेंदबाज़ है लेकिन सचिन बेहतरीन खिलाड़ी हैं.

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  • 20. 23:34 IST, 27 सितम्बर 2011 haarriss:

    रेहान साहब आपके आलेख पर एक ही टिप्पणी काफ़ी है.आपने क्रिकेट की इस भाषा को गली मोहल्ले के झगड़े में तब्दील कर दिया है. सचिन महान खिलाड़ी है. निश्चित रुप से वो शोएब से नहीं डरते होंगे मगर आप सिर्फ़ सेंचुरियन तक सीमित क्यों हैं?और जिस गेंद पर वो ऑउट हुए थे उसे आप ये कहकर आप क्यों कम करना चाहते है कि वो थके हारे थे.

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  • 21. 05:05 IST, 28 सितम्बर 2011 ashish yadav,hyderabad:

    रेहानजी आपने तो पूरे मैच की तस्वीर ही खींच दी. वैसे आजकल ये एक फैशन बन गया है कि कोई भी हस्ती एक किताब लिख देती है और फिर उससे बचने के लिए उसमें बॉलीवुड फ़िल्मों का मसाला झोंक देता है.कुछ ऐसा ही शोएब अख़्तर ने किया है.सचिन और द्रविड जैसे खिलाड़ियों पर टिप्पणी करना सुरज को दिया दिखाने के बराबर है और रावलपिंडी एक्सप्रैस तो कब की पटरी से उतर चुकी है.

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  • 22. 12:41 IST, 28 सितम्बर 2011 mustafa afser:

    रेहाजी आप जो भी कह रहे है वे 100 फीसदी सही है.मैं सचिन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ.

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  • 23. 13:21 IST, 28 सितम्बर 2011 BHEEMAL Dildar nagar:

    रेहान भाई, धन्यवाद इस ब्लॉग के लिए.लेकिन मेरे अनुभव के अनसार मुद्दा और लेखन बीबीसी के स्तर का गंभीर,गहरा और रुचिपूर्वक किया हुआ विश्लेषण होना था.आज कल मुद्दे फ़ीके और निराशपूर्ण लगते हैं.

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  • 24. 15:11 IST, 29 सितम्बर 2011 जितेन्द्र जी, चकफातमा , भागलपुर :

    बीबीसी की पूरी टीम को मेरा प्रणाम
    रेहान जी आपने काफी अच्छा लिखा है. शोएब जी को आपका ब्लॉग जरुर पढना चाहिए.
    हो सकता है इस ब्लॉग को पढकर उन्हें सचिन जी और सभी भारतीय बल्लेबाजों द्वारा धुनाई के दिन याद आ जाये. ऐसे ब्लॉग के लिए रेहान जी आपका कोटि कोटि धन्यवाद.

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  • 25. 16:24 IST, 29 सितम्बर 2011 ganga dhar dwivedi (allahabad):

    रेहान जी उस मैच की यादें ताज़ा करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.बहुत ही बेहतरीन ब्लॉग था.

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  • 26. 22:41 IST, 29 सितम्बर 2011 ibrahim:

    शोएब से अच्छा कोई नहीं है.सचिन, सहवाग, द्रविड और लारा ये सब फैल है शोएब के सामने.

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  • 27. 00:43 IST, 03 अक्तूबर 2011 zafar:

    इतिहास के कूड़ेदान मे फेंक दिये गए शोएब अख्तर कहते है की सचिन उनकी गेंदो
    से डरते थे शायद वो सोचते है की वो अपनी बुरी गेंदो और बुरे बरताओ से पैसे नहीं बना पाये तो शायद अपनी विवादास्पद किताब को बेचकर कुछ पैसे बना लेंगे । रेहान का ब्लाग पड़ने लायक है

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  • 28. 00:39 IST, 04 अक्तूबर 2011 akanksha:

    सचिन सभी पाकिस्तानी गेंदबाज़ों का बाप है.

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  • 29. 07:29 IST, 05 अक्तूबर 2011 haarriss:

    रेहान साहब भी अजीब बात करते हैं रन बनाते-बनाते सचिन तो थक गये थे लेकिन 150 किलोमीटर की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले बॉलर को वे तरोताज़ा समझते हैं..सेंचुरियन का वह मैच मैंने भी देखा था और शोएब कि जिस गेंद पर सचिन ऑउट हुए उस गेंद पर सचिन अगर सौ बार खेलें तो सौ बार उसी तरह ऑउट होंगे. कोलकाता टेस्ट में सचिन और द्रविड़ जिस तरह एक के बाद एक गेंद पर बोल्ड हुए वह यह बताने के लिए काफी है कि सौ चोट सुनार की तो एक चोट लोहार की. सचिन की अंधभक्ति रेहान साहब जैसे अनुभवी और पेशेवर व्यक्ति के लिए आजकल के नेताओं की तरह छोटी बातों से लोकप्रिय होने की झलक है।

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  • 30. 13:35 IST, 12 अक्तूबर 2011 Munna kumar:

    सधन्यवाद रेहान जी, बहुत बढ़िया लेख. सचिन का नाम तो शोएब साहब इसलिए चीख़-चीख़ कर ले रहें हैं ताकि उनकी पुस्तक की बिक्री बढ़े. इसमें कोई दो राय नहीं कि शोएब दुनिया के बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ रहें हैं पर सचिन तो सचिन हैं. कोई भी तेज़ी उनकी चमक को धुंधला नहीं कर पाई.

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