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ट्रेन ब्लॉग- बिहार में कुछ अच्छा ?

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सुशील झा सुशील झा | रविवार, 10 मई 2009, 10:20 IST

बिहार में कुछ अच्छा....सोचने में अटपटा लग सकता है लेकिन अगर खोजा जाए तो मुश्किल नहीं है यह काम.

इस राज्य के बारे में हमेशा से नकारात्मक रिपोर्टिंग होती रही है. विकास नहीं हुआ है उद्योग धंधे बंद हो गए हैं. जातिवाद है, गुंडागर्दी है. और पता नहीं क्या क्या.

ऐसी रिपोर्टिंग मैंने भी की है लेकिन इस बार जब बीबीसी की चुनावी ट्रेन से बिहार पहुंचा तो मैंने सोचा कि क्यों न इस बार बिहार के बारे में पाँच अच्छी बातें भी देखी जाएँ.

तो पहली बात-

ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन- पूरे भारतीय महाद्वीप में या फिर कह सकते हैं कि पूरी दुनिया में पहले लोकतांत्रिक सरकार की अवधारणा बिहार के लिच्छवी शासनकाल में शुरु हुई थी. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति बोधगया में ही हुई थी. जैन धर्म के 24वें गुरु महावीर स्वामी का कार्यक्षेत्र भी बिहार रहा. इतना ही नहीं सिक्खों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह पटना में पैदा हुए थे. दुनिया का पहला विश्वविद्यालय नालंदा बिहार में ही था. ये और बात है इतना सबकुछ होने के बावजूद बिहार को पर्यटन उद्योग से उतना मुनाफ़ा नहीं होता जितना होना चाहिए.


पानी की अधिकता- भारत में विरला ही कोई राज्य होगा जिसमें उतनी नदियाँ बहती होंगी जितनी बिहार में है. कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक,कमला-बलान,गंगा,बागमती लेकिन इसका बिहार को नुकसान ही होता है फ़ायदा नहीं. हर साल बाढ़ आती है इन नदियों में. बाढ़ इसलिए नहीं कि अधिक बारिश होती है बल्कि इसलिए कि नेपाल के साथ इस जल के प्रबंधन के लिए समझौता नहीं हो सका है. अगर इन नदियों के पानी का ढंग से प्रबंधन हो तो बिहार की कई समस्याएँ सुलझ जाएंगी.

जनसंख्या- मानव संसाधन हर देश की निधि होती है लेकिन बिहार का मानव संसाधन ज़बर्दस्त इस मायने में है कि यहां के लोग मज़दूरी भी कर सकते हैं, खेती भी कर सकते हैं और साथ ही सॉफ़्टवेयर इंजीनियर से लेकर हर उस क्षेत्र में सफल हो सकते हैं जहाँ मेहनत से आगे बढ़ा जा सकता है. राज्य से हो रहे पलायन की बात सभी करते हैं लेकिन बिहार के जो लोग पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में काम करने जाते हैं उससे अंततः देश को ही फ़ायदा होता है.

कला शिल्प और विचारधारा- बिहार की कला शिल्प की शायद ही कहीं बात होती हो लेकिन ऐसा नहीं है कि कला के क्षेत्र में बिहार किसी से पीछे है. राज्य के दरभंगा क्षेत्र की मधुबनी पेंटिंग जापान तक में बेहद पसंद की जाती है. टिकुली पेंटिंग हो या फिर भागलपुर का तसर सिल्क पूरे देश में पसंद किया जाता है. थिएटर, प्रगतिवादी विचारधारा में अग्रणी यह वही राज्य है जहाँ गांधीजी ने पहला आंदोलन शुरु किया था. चंपारण से नील की खेती से जुड़ा आंदोलन. पिछले पचास साल की बात करें तो इंदिरा गांधी के शासनकाल में जब आपातकाल लगा तो जेपी आंदोलन की शुरुआत भी बिहार से हुई थी.

सुधा डेयरी- ये नाम बिहार के बाहर भले ही लोगों को नहीं पता हो लेकिन बिहार के घर घर में ये जाना पहचाना नाम है. पिछले एक दशक में राज्य सरकार का यह दुग्ध डेयरी का उपक्रम फ़ायदे में चल रहा है जो एक उपलब्धि है. इसकी तुलना मदर डेयरी से की जा सकती है.

हाँ ये बात और है कि इतनी विविधताओं के बावजूद बिहार पिछड़ा है, जिसके कई कारण हैं लेकिन इतना ज़रुर है कि बिहार में गुंडागर्दी, अपहरण, ग़रीबी और अशिक्षा के अलावा भी बहुत कुछ है जिसके बारे में बात कम की जाती है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 11:43 IST, 10 मई 2009 Amit Sharma:

    सुशील झा जी, एक आप लोग ही हैं कि बिहार को आपने कलम के दम पर बदनाम करते हैं. कारण यह कि सब के सब पत्रकार दूर दृष्टि लगाये डेल्ही मुंबई से ही देखते हैं कि वह कुछ भी नहीं है. वहां सब कुछ है. आपने लिखा पानी की समस्या नहीं है, एक दम सही है, मेरी उम्र अभी 28 साल है लेकिंग आज तक याद नहीं है कि मैं प्यास से कभी मरा हूँ. हाँ पानी पीकर लोग वहां अवश्य मरते है और ये एक आपदा की बात है. आपका प्रयास काफी सराहनीय है. और आशा है कि इसी तरह टिपण्णी लिखते रहेगे ताकि और लोगों (दूसरे प्रदेश) के मन से यह भ्रम निकल जाए कि वहां कुछ भी नहीं है. इस लेख के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद्.

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  • 2. 11:51 IST, 10 मई 2009 rakesh sharma:

    यह रिपोर्ट बिलकुल सही है. मैं इससे सहमत हूँ और मुझे लगता है कि बिहार और अच्छी प्रगति कर सकता है अगर सरकार यहाँ की सड़कों, रोज़ग़ार और रहन सहन के स्तर के लिए कुछ प्रयास करे. तब बिहार भी दूसरे विकसित राज्यों की बराबरी कर सकता है.

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  • 3. 12:15 IST, 10 मई 2009 Devkumar pukhraj:

    वाकई बिहार में गर्व करने लायक बहुत कुछ है. बिहारी अपनी मेहनत और कौशल के बदौलत दुनिया भर में कामयाबी का झंड़ा फहरा रहे हैं. लेकिन एक चीज जो सबसे ज्यादा कचोटती है वो है हमारे राजनेताओं में इच्छाशक्ति की कमी. काश!हमारे नेता अपनी विरासत पर गर्व करना सीखते और राज्य की बेहतरी के लिए प्रयास करते.

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  • 4. 12:40 IST, 10 मई 2009 ankur kr jha:

    आपकी यह रिपोर्ट पढ़कर अच्छा लगा क्योंकि आपको बिहार में कुछ तो अच्छा दिखा. वरना बिहारी मीडिया में बिहार की अच्छाई दिखाने की फुर्सत कहाँ है.

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  • 5. 13:14 IST, 10 मई 2009 bholaram:

    बीबीसी का बिहार और बिहारियों से प्रेम किसी से छुपा नहीं है...ताज़ा ब्लाग इसका नया उदाहरण भर है.

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  • 6. 13:14 IST, 10 मई 2009 amit:

    बिहार के बारे में आपकी बात बिलकुल सही है.

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  • 7. 13:23 IST, 10 मई 2009 acharya Rasabuddhananda, Taipei, Taiwan:

    प्रिय सुशीलजी, ये काम आप लोग मीडिया वालों का है जो जिसे चाहे ऊपर उठा दें या फिर किसी को नीचे बैठा दें. जो भी हो इस बार आपने ये बहुत अच्छा काम किया है. बिहार के बारे में थोड़ा सकारात्मक लिख कर. आप धन्यवाद के पात्र हैं. पर इसके अलावा बहुत कुछ ऐतिहासकि है जिसे आज के भारत के नवयुवाओं को बिहार के बारे में जानने की ज़रूरत है. जैसे आर्यभट्ट बिहार से हुए हैं, भारत का स्वर्ण काल कहा जाए तो बिहार के मगध से ही मौर्य या गुप्त काल में हुआ है., तीसरे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बिहार से हुए हैं. और भी बहुत कुछ लिखने के लि बारी है जैसे कि आपने अपने लेख में लिखा है. ये तो राजनेता लोगों की मेहरबानी है जो बिहार की ये दशा बना कर रखी है. और इसमें थोड़ा बहुत यहाँ की जनता का भी दायित्व है. बिहार में अभी बहुत आधारभूत ढाँचे का काम होना ज़रूरी है. हो भी रहा है. पर प्रयत्न को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षा की भी ज़रूरत होती है. आपके ब्लॉग के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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  • 8. 13:40 IST, 10 मई 2009 samiullah khan:

    एक बिहारी ने ही जीटी रोड बनवाई. सिक्का चलाया पोस्ट और सराय बनवाए.

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  • 9. 14:14 IST, 10 मई 2009 Krishna dulal:

    बिहार में पानी की समस्या के बारे में आपकी बात ग़लत है. यह सच नहीं है कि नेपाल में पानी के उचित प्रबंधन न होने से बिहार में पानी की समस्या है बल्कि बिहार में भी इन नदियों का प्रबंधन ठीक नहीं है. सभी भारतीय तकनीकी पेशेवर मानते हैं कि बिहार में पानी की समस्या आधारभूत ढांचे के ठीक तरह से न बनने से प्राकृतिक पानी के रुकने की वजह से है. कृपया अपने ब्लॉग में सही जानकारी दें और जानकारी के अभाव में ग़लत बात न लिखें.

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  • 10. 14:17 IST, 10 मई 2009 parsuram bhandari:

    बिहार और लालू को केवल नितीश कुमार ही सुधार सकते हैं.

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  • 11. 14:31 IST, 10 मई 2009 shashi:

    धन्यवाद, आपने एक बात और नहीं लिखी. सम्राट अशोक और उसकी उपलब्धि के बारे में.

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  • 12. 15:35 IST, 10 मई 2009 Binod Kumar Lal:

    आपकी रिपोर्टिंग अच्छी लगी.

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  • 13. 16:04 IST, 10 मई 2009 Afsar Mahfooz:

    मैं अरब देशों में काम करता हूँ. झाजी, आपकी बात शत प्रतिशत सही है. हम जानते हैं कि हमारे बिहारी भाइयों में सभी क्षेत्रों में योग्यता हासिल हैं. जब हमें पता लगता है कि हमारे बिहारी भाई किसी बड़े पद पर हैं तो हमें गर्व होता है. अगर बिहार का विकास होगा तो देश का भी विकास होगा. अगर सरकार ईमानदारी से प्रयास करे तो सभी समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं और अपराध का ग्राफ़ नीचे जा सकता है. दूसरे राज्यों में भी बहुत अपराध होते हैं लेकिन मीडिया इस मामले में केवल बिहार को भी ज़्यादा तवज्जो देता है. हमारे युवाओं को ज़्यादा अवसर मिलें तो भी हालात बदल सकते हैं. मैं अपनी सरकार से आग्रह करता हूँ कि वह बिहारियों के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण से सोचे. अगर यहाँ के युवाओं को सब कुछ यहीँ मिल जाए तो वे बाहर जाने के लिए क्यों सोचेंगे.

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  • 14. 16:07 IST, 10 मई 2009 vinay krishna:

    आपका कहना बिलकुल सही है.

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  • 15. 16:19 IST, 10 मई 2009 surendra sharma:

    बिहार ने देश को जो आईएएस अफ़सर दिए उनकी चर्चा आपने नहीं की. बिहार तो अशोक महान की धरती है. लेकिन भ्रष्ट नेताओं ने बिहार का नाम बदनाम किया है.

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  • 16. 16:37 IST, 10 मई 2009 shishir:

    यह बात बहुत अच्छी है. हमें अपने राज्य के बारे में सकारात्मक बातों के प्रसार करना चाहिए. हमें अपने राज्य पर गर्व है.

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  • 17. 16:38 IST, 10 मई 2009 Rabindra Chauhan,Tezpur,Assam:

    बिहार के पाटलिपुत्र से तो सभ्यता की शुरूआत हुई थी. पर पिछले सालों में जो कुशासन राज्य सरकार का रहा है उसी ने बिहार को सभ्यता के मामले में पीछे छोड़ दिया है. कुछ ही दिनों की बात है जब सबी बड़े नेता जातिवाद को ही अपना एजेंडा बनाते थे. पर पिछले तीन चार सालों में नितीश की सरकार ने दिखा दिया है कि सिर्फ़ केंद्र को हर बात में दोषी बताकर जनता को धोखा नहीं दिया जा सकता. जब मैं आठ साल का था तब बिहार गया था. पर मेरे गाँव में सभी लोग किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए थे. कब किसकी काटी हो जाए कहा नहीं जा सकता था. मुझे मजबूर होकर आसाम में आकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी. लोग उपजातियों में बंट चुके थे. किसी गाँव को नौनियापट्टी कहा जाता था तो किसी को अहीरपट्टी कहा जाता था. उसी तरह कोई भूमिहार तबका था तो कोई चमतोली में रहता था. इस तरह से सिर्फ़ बिहारी समुदाय में कितने भाग थे. ऐसे में कोई नेता विकास की राजनीति नहीं करता था बल्कि जाति की राजनीति करता था. पर अब हालात सुधरे हैं. मुझे लगता है नितीश और उनकी सरकार ने दिन रात एक करके काम किया है. जो अब नज़र आता है. सुशील जी ने जिन धरोहरों की बात की है वो हमारे नेताओं के कारण ही आज दुनिया के नक्शे से अलग थलग पड़े हुए हैं.

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  • 18. 17:14 IST, 10 मई 2009 Jaswinder Singh:

    आपका कहना एकदम सही है. मैंने भी बिहार में बहुत कुछ ऐसा देखा है जो सकारात्मक और अच्छा है. नालंदा भारत का गर्व है. बुद्ध भी यहीँ पैदा हुए थे. पश्चिम में लोग बुद्ध को बहुत मानते हैं. इस धर्म की लोकप्रियता हिंदू, सिख और इस्लाम धर्म से भी ज़्यादा है. मेरा मानना है कि राजनेता ही अपने फ़ायदे के लिए इस राज्य के मूल ढाँचे को नहीं बदलना चाहते हैं. बिहार की वर्तमान स्थिति के लिए वही ज़िम्मेदार हैं. अगर मैं ग़लत नहीं हूँ तो ज़्यादातर आईएएस अधिकारी और सिविल सेवाओं में बिहार से ही आते हैं.

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  • 19. 17:48 IST, 10 मई 2009 mukesh kumar:

    मैं आईआईटी खड़गपुर में छात्र हूँ. मुझे इस ब्लॉग को पढ़कर बहुत खुशी हुई है. मैं भी पटना का हूँ. बिहार को अब तक पिछ़ड़ेपन, अपराध, दुर्व्यवहार, अशिक्षा के लिए ही जाना जाता था. लेकिन मैं जब दूसरे राज्यों में गया तो जाना कि बिहार के लोग अनेक मायनों में वहाँ के लोगों से बेहतर हैं. बिहार पिछड़ा हुआ था, वह बात अब पुरानी हो गई है. दूसरे राज्यों के मेरे दोस्त जब पटना आते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि बिहार के बारे में कुछ अवधारणाएं ग़लत हैं और यह उससे काफ़ी बेहतर है जैसा उन्होने सोचा था.

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  • 20. 17:57 IST, 10 मई 2009 Ahmad Khan:

    अच्छा लगा ये सुनकर कि आपने पहली बार बिहार से जुड़ी अच्छी चीज़ों को हाईलाइट किया है. नहीं तो मीडिया ने आज तक बिहार की राजनीति और नकारात्मक बातों को ही दिखाया है.........

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  • 21. 18:16 IST, 10 मई 2009 Anand Saurabh:

    आप उस राज्य की बात कर रहे हैं जिन्हें बीमारू की श्रेणी में रखा गया है लेकिन फिर भी यह अच्छी बात है कि आप इसके बारे में अच्छी बातों को दर्शा रहे हैं. जैसे महावीर और अशोक की धरती. ऐसी धरती जहाँ बुद्ध को बुद्धि मिली. हमें अपने ऐतिहासिक विरासत को सहेज कर रखना चाहिए. यह सुन कर भी अच्छा लगा कि अब बिहार में विकास भी एक मुद्दा बन गया है. सत्तारूढ़ और विपक्षी दल इस मुद्दे पर कुछ कर रहे हैं. अब बिहार एक अंधेर नगरी नहीं रह जाएगा.

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  • 22. 18:29 IST, 10 मई 2009 Maneesh Kumar Sinha:

    मैं समस्तीपुर का रहनेवाला हूँ और आजकल नोएडा में सॉफ़्टवेयर पेशेवर हूँ. आपने बिहार की अच्छाइयाँ बताईं उसके लिए मैं आपकी सराहना करता हूँ.. मुझे विश्वास है कि हमारे संस्कार हमेशा बने रहेंगे. मुझे लगता है कि बिहार की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ की है जो नेताओं की देन है. इससे नेपाल को बिजली मिलती है और हमें मिलती है बाढ़ और बाढ़ से प्रभावित बेहाल लोग. जिन्हें सरकार से न नौकरी मिलती है और न ही कोई और मदद. इसके अलावा यही नेता लोगों को जातिवाद और दूसरे भाषावाद सिखाते हैं. दूसरे देशों की समस्याओं को केंद्र सरकार प्राथमिकता से हल करती है जबकि बिहार सरकार समस्याओं को एकदूसरे पर मढ़ते रहते हैं और गंभीर कुछ नहीं करते. अब मुझे उम्मीद है कि बिहार कुछ प्रगति करेगा क्योंकि यहाँ के अपराध अब काफ़ी कम हो रहे हैं.

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  • 23. 19:02 IST, 10 मई 2009 sanjiv:

    सुशील झा, नमस्कार, मैं एक अदना सा पाठक हूँ बीबीसी का. पहली बार किसी ने बिहार के बारे में इतनी अच्छी बातें लिखी हैं. धन्यवाद. वैसे पहले भी हमें आपने बिहारी होने पर गर्व था पर आज आपके लेख ने हमारे आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है.....

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  • 24. 19:25 IST, 10 मई 2009 samir azad kanpur:

    बिहार एक धनी प्रदेश है जहाँ के निवासी निर्धन हैं और इसके दोषी वे स्वयं हैं.

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  • 25. 19:56 IST, 10 मई 2009 shweta:

    बिहार और उत्तर प्रदेश इसलिए कम विकसित हैं क्योंकि यहाँ के पढ़ेलिखे लोग नौकरी के लिए दूसरे स्थानों पर चले जाते हैं. और जो एक बार चला जाता है वह वापस नहीं आता. वे अपनी योग्यता और बुद्धि का इस्तेमाल वहीं करता है और सेवानिवृत्त होने के बाद भी नहीं आता क्योंकि इतने दिनों में वह वहीँ का होकर रह जाता है.

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  • 26. 21:10 IST, 10 मई 2009 Mohammad Iftekhar Ahmed:

    प्रिय सुशील जी, बिहार पर आपका ब्लॉग अच्छा लगा. मैं भी बिहार का हूँ और आबूधाबी में काम करता हूँ. मुझे लगता है कि बिहार की एक मुख्य समस्या अशिक्षा की भी है जो हमें अपनी अंदरूनी शक्ति दिखाने का मौका ही नहीं दे रही. इस मामले में नेता ही लोगों की मदद कर सकते हैं लेकिन हम जानते हैं कि हमारे नेताओं की बुद्धि कैसी है. हालाँकि अब दिन बदल रहे हैं. जो हमें बिहार के अच्छे भविष्य के संकेत दे रहे हैं.

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  • 27. 21:28 IST, 10 मई 2009 vinay shankar:

    बिहार कई क्रांतियों की जन्मस्थली है. यह साँस भी लेता है तो हिन्दुस्तान की खबर बन जाता है. उस बिहार में सिर्फ़ पाँच अच्छाई मिलीं आपको. बिहार जिसने कभी उपराष्ट्रवाद को बढ़ावा नहीं दिया. जिसने कभी नहीं कहा कि मैं बिहारी हूँ. वह हमेशा बोला की मैं भारतीय हूँ. बिहार वह भूमि है, जहाँ आपके पास बूता और लगन हो तो आप कुछ भी कर सकते हैं, नहीं तो लालू, नीतिश और रामविलास जैसे नेता कभी आगे नहीं आते. जार्ज जैसे नेता बाहर से आकर उसे अपनी कर्मभूमि नहीं बनाते. बिहार जिसकी चंचलता उसकी नदियों के समान है, जो की वहां की आम जीवन शैली मैं दिखाती है. बिहार जिसके आम आदमी के चेहरे पर हमेशा सहयोगात्मक मुस्कान रहती है. आपने तो सतही अच्छाई बताई. बस समय की बात है विकास की राह पर चल पड़ा है देखियेगा नई उँचाईयों को छुएगा, फिर एक नयी क्रांति का गवाह बनेगा. बिहार तो हिन्दुस्तान का दिल है.

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  • 28. 22:59 IST, 10 मई 2009 sunil kumar gupta:

    बिहार के बारे में कुछ अच्छा सुनकर अच्छा लगा.

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  • 29. 23:10 IST, 10 मई 2009 Anmol Kumar:

    मेरे विचार से बिहार की सबसे बड़ी निधि है वहां के सीधेसादे, मेहनतकश और जीवन में कुछ कर गुजरने की आकांक्षा रखने वाले लोग! बिहार से कहीं ज़्यादा गुंडागर्दी तो भारत के मेट्रोपोलिटन कहे जाने वाले दिल्ली और मुंबई मे होती है! ये बिहार की एक साल पहले की घटना है , मेरे गाँव का एक दोस्त रात के सात बजे मोटरसाईकिल से अपनी चाची को ले के समस्तीपुर शहर से गाँव को लौट रहा था रास्ते मे एक सुनसान सी जगह पर दो तीन गुंडों ने उसको रो़क कर उसका मोटरसाईकिल, मोबाइल फ़ोन, घडी छीन ली ! लेकिन फिर उन गुंडों ने ये कहते हुए मेरे दोस्त की मोटरसाईकिल लौटा दी कि तुम एक औरत को ले कर इस सुनसान जगह से अपने घर कैसे जाओगे ! क्या गुंडों की ऐसी दरियादिली दिल्ली और मुंबई में भी हो सकती है? ये घटना दर्शाती है कि बिहार मे गुंडागर्दी है लेकिन इस ये नहीं कि वहां बुरे लोग रहते हैं पर इस गुंडागर्दी के लिए जिम्मेदार वह लोग हैं जिन्होंने वहां पिछले 60 साल राज किया. वहां के लोगों को शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं तक न दे सके!

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  • 30. 23:17 IST, 10 मई 2009 Vinay kumar:

    यह सब नितीश कुमारे के प्रयासों का असर है. धन्यवाद बीबीसी.

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  • 31. 02:45 IST, 11 मई 2009 अरुण कुमार मंडल:

    आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है. आज बिहार के बाहर बिहार की अच्छी तस्वीर नहीं है, लेकिन बिहार आज भी बहुत कुछ मामले में अग्रणी है. बिहार के लोग परिश्रमी होते हैं और अपने बल-बूते आगे बढ़ते हैं. आज से 15-20 साल पहले बिहार में गरीबी थी, लेकिन आज नये प्रकार की खेती और तकनीकी से समृद्ध होते जा रहे हैं. जहां पहले गांव में एक मोटर साइकिल हुआ करता था, आज हर घर में हीरो होंडा है. बिहार की अच्छी तस्वीर पेश करने के लिए धन्यवाद

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  • 32. 03:22 IST, 11 मई 2009 jay bharat:

    मुझे आपके बिहार के बारे में की गई टिप्पणी बहुत अच्छी लगी. मैं तो हमेशा बिहारी होने में गर्व महसूस करता हूँ.

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  • 33. 03:44 IST, 11 मई 2009 Rajiv Ranjan:

    किसी भी सिक्के के दो पहलू होते हैं. पत्रकार समुदाय ने बिहार के नकारात्मक छवि ही पेश की है. आपने भी अपने ब्लॉग में बिहार की अच्छाई लिखी तो है लेकिन लिखने का अंदाज़ नकारात्मक है.

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  • 34. 03:56 IST, 11 मई 2009 dilip kumar:

    झाजी, शायद आप बहुत कुछ भूल गए. मगध, पाटलिपुत्र, तक्षशिला. डॉ राजेंद्र प्रसाद को तो भूल ही गए जो देश के पहले राष्ट्रपति थे. आप महावीर की जन्मभूमि वैशाली को कैसे भूल गए जिन्होंने समस्त विश्व को एक बिलकुल अलग राह दिखाई. जयप्रकाश नारायण बाबू को आज आप ने याद किया होता. पूर्णिया के फणींश्वर नाथ रेणु को याद किया होता जो बाबू प्रेमचंद से कुछ कम आंचलिक लेखक हुए. हर साल बिहारी संपूर्ण राष्ट्र को बहुत अच्छे इंजीनियर देते हैं. इस कर्म में आप सुपर 30 को याद कीजिए जिसके बारे में डिस्कवरी चैनल ने दो घंटे की डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी. मीडिया वालों ने हद तक बिहार और बिहारियों को बहुत कुछ बदनाम किया है और कुछ ऐसे लोग हैं जो बिहार को रसातल में डाल कर खुद को मैनेजमेंट गुरू कहलवाते हैं.

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  • 35. 04:51 IST, 11 मई 2009 Jeetendra Kumar:

    सत्य ही है. बिहार ने भारत को पहले राष्ट्रपति दिए हैं. बिहार को इसके ही लोगों ने अनदेखा किया है. किसी को तो बिहार की प्रगति के बारे में सोचना चाहिए. धन्यवाद.

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  • 36. 05:08 IST, 11 मई 2009 neyaz ahmad:

    अच्छे विचार हैं.

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  • 37. 05:54 IST, 11 मई 2009 शशि सिंह :

    कहना बहुत कुछ चाहता हूं... लेकिन... वक़्त अब कहने-सुनने के लिए नहीं बचा, अब तो बस करने का समय हैं। धन्यवाद सुशील!

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  • 38. 06:11 IST, 11 मई 2009 Mithilesh Jha :

    सुशील झा, नमस्कार, पहली बार किसी ने बिहार के बारे में इतनी अच्छी बातें लिखी हैं. धन्यवाद. वैसे पहले भी हमें आपने बिहारी होने पर गर्व था पर आज आपके लेख ने हमारे आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है.....

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  • 39. 06:41 IST, 11 मई 2009 bhumika bhandari:

    वाकई बढ़िया....मुझे खुशी है कि किसी पत्रकार ने तो बिहार की प्रगति के बारे में लिखा.

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  • 40. 07:19 IST, 11 मई 2009 Dharmveer Kumar:

    सुशील जी, मैं आपको और उन सभी बंधुओं को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने बिहार की अच्छाइयों के बारे में लिखा. इन सभी का परिणाम यह हुआ कि बिहार से धीरे धीरे सारी अच्छाइयाँ कम होती जा रही हैं. मुझे दिल्ली में रहते हुए पाँच साल हो गए हैं. लेकिन जितनी दिक्कतें दिल्ली में रहने में आईं उतनी बिहार में रहते कभी नहीं आईं. एक कहावत है...निंदक नियरे राखिए...

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  • 41. 07:22 IST, 11 मई 2009 Kamlesh Kumar Sahu:

    बिहार की नियति भी छत्तीसगढ़ की ही तरह है... सबसे अमीर धरती, सबसे गरीब लोग...

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  • 42. 07:34 IST, 11 मई 2009 Alok Mishra:

    झा जी, मुझे हमेशा लगता है कि एक बिहारी को बिहार के बारे में सोचना चाहिए चाहे वह बिहार में रहता हो या नहीं. अगर बिहार के लोग दिल से चाहेंगे तो बिहार का सब अच्छा हो जाएगा. हम बिहारी आपसे हमेशा बिहार के बारे में सच्ची रिपोर्टिंग की उम्मीद रखते हैं. इससे शायद खराब लोगों को बिहार से ख़त्म किया जा सके. बिहार के इतिहास के बारे में सोचने से नैतिक समर्थन के साथ बिहारियों को गर्व का भी अहसास होता है. लेकिन फिर भी अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है. बिहार के लिए सभी दरवाज़े खुलने का एकमात्र रास्ता बेहतर प्रबंधन है. भ्रष्टाचार, विकास, राशि का प्रबंधन और शिक्षा कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनके बारे में सोचा जाना चाहिए. वर्तमान सरकार काफ़ी अच्छा काम कर रही है लेकिन फिर भी कुछ तेज़ी की ज़रूरत है. कुछ लोग बिहार को बदनाम कर रहे हैं. दरअसल उनके ख़िलाफ़ ठीक प्रकार से कड़े कदम उठाए जाने चाहिए. राज्य में आईटी लाने से कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हल हो सकते हैं. अगर आंध्र में चंद्रबाबू नायडू ऐसा कर सकते हैं तो नितीश कुमार बिहार के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते.

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  • 43. 07:39 IST, 11 मई 2009 Sanjay :

    बिहारी अगर बिहार को सच्चा प्यार करने लग जाएं तो देखिए बिहार कहाँ से कहाँ चला जाता है. लालू को ही देखिए जब आँख खुली तो रेलवे का ही उद्धार कर डाला. बिहारी कहीं भी जाकर अपनी योग्यता का लोहा मनवा लेते हैं. इसीलिए सबों की आँखों की किरकिरी बन जाते हैं. आवश्यकता है कि इतना रोज़ग़ार उपलब्ध कराया जाए कि कम से कम लोगों को राज्य से बाहर जाना पड़े.

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  • 44. 07:39 IST, 11 मई 2009 Mukesh kumar:

    बीबीसी को बधाई देता हूँ जिसने कोई अच्छी सी बात बिहार के बारे में ब्लॉग पर पोस्ट की है. आज बिहार को बदनाम करने में सभी लोग लगे रहते हैं, किंतु वो नहीं जानते हैं कि बिहार से कोई क्रांति शुरू होती हैं तो संपूर्ण क्रांति बन जाती है. जो लोग बिहार को छोड़कर जा रहे हैं, कल ज़रूर बिहार आएंगे क्योंकि जो अपनापन अपने प्रदेश में है वो कहीं भी नहीं है. अपने प्रदेश का मान करो तभी आपका एवं आपके राष्ट्र को मान होगा.

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  • 45. 08:04 IST, 11 मई 2009 Rajesh Kumar Abhay:

    शुक्रिया बिहार के बारे में अच्छा सोचने के लिए. आज हमें खुशी हो रही है कि आपलोग हमारी मातृभूमि बिहार के बारे में कुछ अच्छा भी सोचते हैं. इतिहास गवाह है कि जिस धर्म को आपनाकर विश्व के कई देश तरक्की कर गए उसका जन्मदाता बिहार ही है. बस एक ही कारण है हमारे पिछड़ेपन का और वो है प्राकृतिक आपदा जो अरबों की संपत्ति को खा जाती है.

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  • 46. 08:19 IST, 11 मई 2009 Anant Kumar Annu:

    आपको धन्यवाद इस रिपोर्ट के लिए. कम से कम आपने बिहार में कुछ तो पॉज़िटिव देखा. नहीं तो सारे रिपोर्टर बस इसके नकारात्मक पक्ष ही देखते हैं. सारे भारत में आपको बिहार के लोग अच्छे पदों पर भी मिल जाएंगे. हमारे देश के पहले राष्ट्रपति भी बिहार के ही थे.

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  • 47. 08:50 IST, 11 मई 2009 BANKE BIHARI JHA:

    आपका कहना बिलकुल सही है. अंततया हमें कोई तो सकारात्मक खबर मिली. मुझे उम्मीद है कि यह अंतिम नहीं होगी बल्कि यह तो शुरूआत है. बीबीसी को बिहार की समृद्ध संस्कृति और इसकी संपदा पर एक श्रृंखला शुरू करनी चाहिए ताकि दुनिया को इसकी सकारात्मक छवि मिले.

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  • 48. 08:55 IST, 11 मई 2009 अख़तर मोहम्मद कलीम :

    सुशील झा जी , नमस्कार,
    सब से पहले तो मैं आपका बहुत बहुत शुक्रिया अदा करता हूँ कि कम से कम किसी ने तो आज पहली बार बिहार के बारे में अच्छाई लिखी है. लेकिन यह सुन कर अफ़सोस भी हुआ कि "बिहार में कुछ अच्छा....सोचने में अटपटा लग सकता है" मुझे लगता है कि आप बिहार के नहीं हैं आप असली मीडिया वाले हैं. जो इस प्रकार की बातें लिखी हैं. आप ने एक बात जो सब से ज़रूरी है को तो अपने ब्लॉग में शामिल किया ही नही है. और वो है बिहारी का प्यार.
    आप चाहे किसी भी प्रांत के हों बिहारी आप से कभी भी प्रांत के आधार या जाति के आधार पर या मज़हब के आधार पर प्यार नहीं करता है , वह तो बस यह सोचता है कि आप एक हिन्दुस्तानी हो और यह एक हिन्दुस्तानी का फ़र्ज़ है.

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  • 49. 09:49 IST, 11 मई 2009 BHAGESHWAR ROY:

    धन्यवाद सुशील जी.

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  • 50. 10:49 IST, 11 मई 2009 sanjeev kumar:

    सुशीलजी, आपने अपने ब्लॉग में ठीक ही लिखा है कि बिहार में सबकुछ है. जहाँ सब कुछ है वहाँ वो भी होगा जिसको मीडिया में ज़्यादा बताया जाता है. वहाँ सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस और हर क्षेत्र में टॉपर मिल जाएंगे. आज मंत्रालय में सबसे ज़्यादा संयुक्त निदेशक, निदेशक दिल्ली में 45 डीसीपी स्तर के पुलिस अधिकारी भी बिहार से ही आते हैं. आपका ब्लॉग पढ़ कर काफ़ी खुशी हुई. यहाँ तक कि आपके प्रश्न पूछने वाले कॉलम में भी सबसे ज़्यादा बिहार से ही सवाल पूछे जाते हैं. इससे पता लगता है कि बिहारी भाई कितने संजीदा होते हैं. चाहे किसी भी क्षेत्र से ले लीजिए. धन्यवाद!

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  • 51. 06:40 IST, 12 मई 2009 prabhakar kumar:

    झा जी, आपने बिहार के बारे में जो लिखा है, सही है. मैं एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हूँ. हमारे बिहार को बदनाम करने में राजनेता का सबसे बड़ा हाथ है. और आप जैसे पत्रकार की मेहरबानी जिसे चाहे टॉप पर या जिसे चाहे नीचे कर दें, बिहारी के पास सब कुछ है और कहीं भी अच्छी तरह मेहनत करके जी सकते हैं. लेकिन कुछ बिहारी युवा पीढ़ी इसे बदनाम करने की कोशिश देश के हर भाग में करती हैं. लिखने को बहुत कुछ है लेकिन आप लोग थोड़ी मेहरबानी कर बिहार के बारे में अच्छा लिखते रहें...........

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  • 52. 20:23 IST, 14 मई 2009 धीरज वशिष्ठ:

    बिहार की अच्छाई लिखने बैठूं तो शायद आपका दिया स्पेस काफी छोटा पड़ जाए. गौर से देखें तो पूरे देश का इतिहास बिहार का इतिहास जान पड़ेगा. काफी कुछ लिखने की इच्छा थी, लेकिन आपके शीर्षक- 'बिहार में कुछ अच्छा खोजने की कोशिश' से काफी आहत हुआ. ये शीर्षक बेहद घटिया और बिहार के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित है. बीबीसी जैसे पत्रकारिता के संस्थान से इस तरह के पूर्वाग्रह की उम्मीद कभी नहीं थी. खासतौर पर आप जैसे मागधों ( प्राचीन समय में बिहारियों को मागध नाम से पुकारा जाता था) से बिल्कुल नहीं.

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  • 53. 07:35 IST, 15 मई 2009 shishuraj:

    दोस्तो से,कार्यस्थल पर सहयोगीयों से या यदाकदा किसी से कभी भी... जब भी बात होती है बिहार की, एक ही बात सामने निकल कर आती है कि सबकुछ ठीक है पर बिहार बेकार है और ना जाने एक अलग तरह की स्माइल जिसे आप ऐसे ही मौके पर देख पायेंगे...सवाल ये उठता है कि क्यों ? कैसे ? और कब तक ? एक पत्रकार होने के बावजूद हम दस लोगों के सवाल का सटीक जवाब सामने वाले के समझ के हिसाब से हर बार नहीं दे पाते हैं या देना मुश्किल होता है...कभी-कभी लगता है कि बिहारियों के लिए ये समय(दौर) ठीक नहीं है...इस पीड़ा को कोई कैसे सहन करे ? मैं समझता हूं ये सभी के लिए दूखदायी है...

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  • 54. 13:38 IST, 15 मई 2009 rajkumarsingh:

    आपने बिहार को अपनी पावनी नज़र से देखा उसके लिए हर बिहारवाली आपको तहेदिल से शुक्रिया कहता है और आशा है कि आप बिहार की अच्छाइयों को भविष्य में भी ऐसे ही प्रकाशित करते रहेंगे. मैं इस वक्त दोहा क़तर में काम कर रहा हूँ, मगर जितना मुझे बिहार पसंद है उतना ही आपका बीबीसी भी.

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  • 55. 17:23 IST, 15 मई 2009 satyandra yadav:

    .....आपने जो भी लिखा, सही है.......लेकिन मीडिया में सबसे ज़्यादा बिहारी भाई लोग है. लेकिन ये लोग कभी भी बिहार की पत्रकारिता नहीं करते और सिर्फ़ अपने को टीवी पर दिखाने और चिकना बनने में ही लगे रहते हैं. खैर कुछ भी हो, बिहार संपन्न है और पहले भी था. सिर्फ़ यहाँ के नेता सही से बिहार के परिदृश्य को नहीं दिखा पाए हैं....

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  • 56. 09:40 IST, 16 मई 2009 ओमप्रकाश केशरी:

    श्रीमान, नमस्कार, अच्छा होगा कि कांग्रेस को सहयोग दें और बिहार को प्रगति की ओर ले जाएं.

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  • 57. 11:06 IST, 16 मई 2009 Amit Singh:

    वाकई बढ़िया....मुझे खुशी है कि किसी पत्रकार ने तो बिहार की प्रगति के बारे में लिखा. आज हमें खुशी हो रही है कि आपलोग हमारी मातृभूमि बिहार के बारे में कुछ अच्छा भी सोचते हैं. इतिहास गवाह है कि जिस धर्म को आपनाकर विश्व के कई देश तरक्की कर गए उसका जन्मदाता बिहार ही है. बस एक ही कारण है हमारे पिछड़ेपन का और वो है प्राकृतिक आपदा जो अरबों की संपत्ति को खा जाती है.

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  • 58. 11:09 IST, 16 मई 2009 Pradeep Kumar Das:

    महोदय, अन्य बातों के अलावा बिहार में कामग़ारों के पलायन की बातें की जाती हैं. परंतु बिहार में सबसे अधिक प्रशासनिक अधिकारी यानी आईएएस और आईपीएस भी बिहार ही पैदा करता है. इसे कभी कभी नहीं भुलाना चाहिए. फिर भी आपकी अभी वाली रिपोर्टिंग अच्छी लगी. आशा है बिहार के बारे में सकारात्मक रिपोर्टिंग भी होगी. धन्यवाद.

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  • 59. 15:16 IST, 16 मई 2009 P N Pranav:

    सुशील जी धन्यवाद, मैं मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले का रहने वाला हूँ और तत्काल राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम में इंजिनियर के पद पर कार्यरत हूँ. यहाँ के लोग हमें वही सब बिहार के बारे में बताते हैं जो समाचारों में होता है. हमारी बात पर कोई विश्वास नहीं करता. आपने बिल्कुल सत्य लिखा है. कृप्या इस तरह की पत्रकारिता को बढ़ावा दें.

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  • 60. 16:16 IST, 16 मई 2009 Anil kumar Gupta:

    बिहार के बारे में अच्छा वक्तव्य देने के लिए धन्यवाद.

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